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आग की घटनाओं 91 लाख से अधिक की क्षति

Sun, 15 Apr 2018 11:18 PM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
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अग्निशमन केंद्र। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना।  मौसम की मार झेल रहे कुशीनगर के ग्रामीण अंचल में लोगों की जरा सी लापरवाही अग्निकांडों को भी बढ़ावा दे रही है। चूल्हे और अलाव से छिटकी चिंगारी हवा का शह पाकर शोला बन जा रही है। अग्नि शमन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जनवरी से मार्च के बीच आगलगी की 157 घटनाओं में 91 लाख रुपये से अधिक की क्षति हुई है। इन घटनाओं में तीन दर्जन से अधिक पशुओं की भी जान चली गई। राहत की बात बस इतनी है कि इस बार कोई जनहानि नहीं है। परंतु पछुआ हवा सुस्त होने और बारिश के बावजूद आगलगी की इतनी घटनाएं चिंताजनक हैं।
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खड्डा से लेकर तमकुहीराज तक गंडक नदी के किनारे बसे गांवों में अब भी बड़ी संख्या में लोग झोपड़ी डालकर रहते हैं। जिनके पास दो-चार कमरे का पक्का मकान है वे भी जानवरों के बांधने तथा अनाज आदि रखने के लिए एकाध झोपड़ी जरूर बनाते हैं। वैसे तो फूस के इन घरों में आग लगने की घटनाएं पूरे वर्ष भर होती हैं, लेकिन जनवरी महीने के बाद जैसे ही मौसम खुश्क होना शुरू होता है आग लगने की घटनाएं भी बढ़ने लगती हैं। सबसे संवेदनशील स्थिति मार्च से लेकर मई तक रहती है। तेज धूप और पछुआ हवा के चलते हल्की सी लापरवाही बड़े अग्निकांड का सबब बन जाती है। हालांकि इस बार पछुआ हवाओं का जोर नहीं है, फिर भी आग लगने के मामले कम नहीं हो रहे। अधिकांश घटनाएं भोजन बनाते समय चूल्हे से छिटकी चिंगारी अथवा जानवरों के पास जलाए गए अलाव के चलते हो रही हैं। 

आगलगी के मामले में आंकड़ों के लिहाज से वर्ष 2016 को खतरनाक की श्रेणी में रखा जा सकता है। वजह यह कि उस वर्ष आग लगने की 274 घटनाएं हुई थीं। उन घटनाओं में आठ मनुष्यों और 53 पशुओं की जलने से मौत हो गई थी। इसके अलावा पांच करोड़ 28 लाख रुपये से अधिक की क्षति हुई थी। वर्ष 2015 में भी आगलगी की 166 घटनाएं हुई थीं, जिनमें तीन मनुष्य व 11 पशुओं की मौत हुई थी। डेढ़ करोड़ से अधिक की संपत्ति जलकर नष्ट हो गई थी। वर्ष 2017 में भी आग लगने की 267 घटनाएं हुई थीं जिनमें एक व्यक्ति तथा 40 पशुओं की मौत हुई थी। करीब दो करोड़ रुपये की संपत्ति जलकर नष्ट हुई थी। इस वर्ष भी जनवरी से मार्च के बीच आग लगने की 157 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 31 पशुओं की जलने से मौत हो चुकी है। इन घटनाओं में 91 लाख से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है। 
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आग लगने पर नियंत्रण के लिए अग्निशमन विभाग के पांस संसाधनों की कमी नहीं है। जिला अग्निशमन अधिकारी राधेश्याम शरण सिंह के अनुसार पडरौना, खड्डा और तमकुहीराज में अग्निशमन केंद्र है। विभाग के पास पांच बड़ी गाड़ियां, तीन छोटी गाड़ियां तथा 10 पोर्टेबल पंप भी है। परंतु झोपड़ी में लगी आग और रास्ते की दिक्कत के चलते घटनाओं पर नियंत्रण करना आसान नहीं होता। ग्रामीण क्षेत्र में रास्ता तंग होने की वजह से कई बार गाड़ी समय से घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाती। 
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