पडरौना/तमकुहीरोड। गंडक नदी में सितम्बर महीने की 10 तारीख को फिर बाढ़ आ सकती है। वाल्मीकिनगर बैराज से नदी में छह लाख क्युसेक से अधिक पानी छोड़े जाने की आशंका है। इसको देखते हुए कुशीनगर के जिला प्रशासन ने अफसरों तथा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क करना शुरू कर दिया है। हिमालय के भीतरी हिस्से से निकलने वाली गंडक नदी के पानी का नियंत्रण वाल्मीकिनगर में बैराज से होता है। बीते 13 अगस्त को नेपाल में हो रही भारी बरसात के चलते वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में अचानक 5.17 लाख क्युसेक पानी छोड़ दिया गया था। इसके चलते खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में बाढ़ आ गई थी। पानी के दबाव से खड्डा क्षेत्र में बिहार का गाइड बांध व दुदही क्षेत्र में पिपरा-पिपरासी बांध टूट गया था। इसकी वजह से जिले में 100 से अधिक गांवों में बाढ़ आ गई। एक पखवारा बाद भी स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाई है।
इससे पहले वर्ष 2002 में एक बार गंडक नदी का जलस्तर छह लाख से ऊपर पहुंचा था और तब बाढ़ का पानी गोरखपुर-छितौनी रेल लाइन पर पहुंच गया था। कई जगह बांध टूट गया था। पूर्व के अनुभव को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पहले से ही बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों को सतर्क करना शुरू कर दिया है। डीएम आंद्रा वामसी खुद खड्डा क्षेत्र के छितौनी और तमकुहीराज क्षेत्र के जंगलीपट्टी में आयोजित राहत वितरण शिविर में लोगों को अभी एक और बाढ़ से सतर्क रहने की बात कही है।
इस संबंध में डीएम आंद्रा वामसी ने बताया कि वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने की संभावना है। इसीलिए बाढ़ आपदा से जुडे़ अधिकारियों एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सावधान रहने को कहा गया है। प्रशासन स्थिति पर पूरी तरह से नजर लगाए हुए है, लेकिन लोगों को खुद भी सतर्क रहना होगा।
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नेपाल से मिला है अलर्ट मैसेज
इसी बीच कुशीनगर जिला प्रशासन को नेेपाल की तरफ से एक और अलर्ट मैसेज मिला है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि सितम्बर के प्रथम सप्ताह में हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक बरसात के चलते गंडक नदी का जलस्तर बढ़ सकता है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो आगामी 10 सितम्बर को वाल्मीकिनगर बैराज से 6 लाख क्युसेक से अधिक पानी छोड़ने की आशंका जताई गई है। अगर ये चेतावनी सच साबित हुई तो कुशीनगर जिले में गंडक नदी तबाही मचा देगी।