फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अहिरौलीदान गांव के सामने हो रहा है कटान

विज्ञापन
विज्ञापन
तमकुहीरोड (कुशीनगर)। गंडक नदी तेजी से अहिरौलीदान गांव के कंचन टोला, डीह टोला और कचहरी टोला को अपनी आगोश में समेट रही है। सोमवार की शाम को बाढ़ खंड डिवीजन के अफसर कटान देखने मौके पर गए थे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है। अफसरों का कहना है कि यहां कटान रोकने के लिए शासन स्तर से कोई परियोजना स्वीकृत ही नहीं हो पाई है। कटान देखकर भयभीत गांव के लोग अपने घरों को उजाड़कर दूसरी जगह जाने लगे हैं।
विज्ञापन

गंडक नदी पिछले तीन साल से अहिरौलदान गांव के सामने कटान कर रही है। नदी के जलस्तर में तेजी से उतार-चढ़ाव के बाद एक सप्ताह से यहां कटान तेज हो गया है। चितू टोला के सभी लोग अपने सामान समेत गांव से पलायन कर चुके हैं। कंचन टोला के भी अधिकांश लोग यहां से जा चुके हैं। जिन चार-पांच घरों के लोग अभी तक यहां रुके थे, मंगलवार से भी अपनी झोपड़ी एवं सामान समेत पलायन करने लगे हैं। इस टोला निवासी राधेश्याम राम ने बताया कि घर बचने की अब कोई उम्मीद नहीं बची है।
कचहरी टोला व डीह टोला के लोग भी भयभीत हैं और अपने कीमत सामान हटाना शुरू कर चुके हैं। मंगलवार को कचहरी टोला निवासी बलिराम सिंह का खेत व शीशम का पेड़ देखते ही देखते धारा में विलीन हो गया। यहां के निवासी सुजीत यादव, रामनाथ राम, उमेश राम, रामजीत, कोदई, अवधकिशोर, बिरझन आदि का कहना है कि नदी हर दिन खेतों को काटते हुए आगे बढ़ रही है। अभी तक कटान रोकने का कोई व्यवस्था नहीं होने से अब घर बचने की उम्मीद नहीं है। सोमवार की शाम को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह, सहायक अभियंता पीसी त्रिपाठी, अवर अभियंता विरेंद्र प्रताप सिंह, रमेश दूबे, श्रीराम यादव आदि ने कटान का जायजा लिया। अधिशासी अभियंता बीपी सिंह ने बताया कि यहां कटान रोकने के लिए बड़ी परियोजना की आवश्यकता है। कई बार उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन परियोजनाओं की स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से बचाव कार्य कराना संभव नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें