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अहिरौलीदान गांव के सामने हो रहे कटान का मामला

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कुशीनगर। अहिरौलीदान गांव के डीह टोला के सामने गंडक नदी का कटान तेज होने से शुक्रवार को यहां के वाशिंदों की बेचैनी बढ़ गई है। घरों के समीप आ चुकी नदी के कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड डिवीजन की तरफ से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। कटान के भय से विवश लोग अपना पक्का मकान व झोपड़ी उजाड़ने में लगे हैं।
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गंडक नदी की कटान से वर्ष 2012 में अहिरौलीदान के बैरिया टोला का अस्तित्व मिट गया था। पिपराघाट से लेकर अहिरौलीदान तक तबाही मचाने वाली गंडक नदी इस बार अहिरौलीदान के टोलों में कटान कर रही है। बीते 11 दिन से हो रही कटान के चलते चित्तू टोला के सभी लोग अपना घर उजाड़कर यहां से जा चुके हैं। कंचन टोला के अधिकांश लोग भी उजड़ चुके हैं। अब डीह टोला नदी के सीधे निशाने पर आ गया है। शुक्रवार से इस टोला के सामने कटान तेज होने लोगों की बेचैनी और बढ़ गई। इस टोला निवासी दीनानाथ यादव, भोला, ठग, रामजीत, कोदई, सिंहासन, अवध किशोर, सुरेंद्र, रामनाथ, उमेश, कंचन आदि अपना सामान समेटकर गांव छोड़ चुके हैं। बाकी लोग भी शुक्रवार को अपना घर उजाड़ने में लगे थे। भाजपा नेता व इस गांव के निवासी जेके सिंह का कहना है कि नदी जिस हिसाब से कटान कर रही है उससे लगता है कि गांव का अस्तित्व नहीं बचेगा। अरविंद सिंह पटेल व सुजीत यादव कहते हैं कि अहिरौलीदान को बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से अब तक कोई प्रयास नहीं किया जाना बेहद अफसोसजनक है। विस्थापित हो चुके भगत यादव, बिहारी यादव, चन्द्रिका यादव, बलिराम सिंह, रामनाथ राम आदि का कहना है कि प्रशासन की तरफ से अब तक उन लोगों की खोज खबर नहीं ली गई है। घर छोड़ने के बाद अब रहने का भी संकट पैदा हो गया है। इस संबंध में एडीएम कृष्णलाल तिवारी का कहना है कि बाढ़ व कटान से हो रही क्षति का आंकलन राजस्व विभाग कर रहा है। रिपोर्ट के आधार पर बाढ़ पीड़ितों को क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी।
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