पडरौना। शहर में बंद पड़ी कानपुर शुगर मिल को दोबारा चलाने की कवायद तेज हो गई है। मिल की भूमि से कब्जा हटाने के लिए पैमाइश भी की जा रही है, लेकिन इसे हटा पाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
हालांकि मिल के नाम से दर्ज जमीनों के पुराने और नए नंबरों की गहनता से जांच की जा रही है, जिससे कब्जाधारकों में हड़कंप मचा है।
चीनी मिल के नाम से दर्ज पुराने नंबर के अनुसार के पडरौना और विशुनपुरा में 165.47 एकड़ जमीन में से मौजूदा समय में मिल का केवल 25 एकड़ जमीन पर ही कब्जा है। बाकी 140 एकड़ जमीनों पर अन्य लोगों का कब्जा है।
आश्चर्य की बात यह है कि कब्जा हुई मिली की जमीन को अतिक्रमणकारियों ने राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से अपने नाम करा लिया है। अब मिल चलाने से पहले प्रशासन को उसकी जमीनों से अतिक्रमण हटाना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि कई ऐसे कब्जाधारी हैं, जिन्होंने उसपर पक्का निर्माण करा लिया है।
जानकारी के मुताबिक पडरौना में चीनी मिल वर्ष 1920 में पडरौना राज परिवार ने बनवाया था। वर्ष 1956 में नीलामी में इस मिल को कानपुर शुगर वर्क्स ने खरीद लिया था। इसका ज्यादातर हिस्सा पडरौना तहसील के राजस्व गांव जंगल विशुनपुरा में है। राजस्वकर्मियों के अनुसार मिल के नाम से 165.47 एकड़ जमीन थी। मिल की जमीन पर कब्जे के आधार पर राजस्व अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर 100 से अधिक लोगों ने अपना नाम दर्ज करा लिया। राजस्व विभाग में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार मिल के पुराने नंबर में कुल 31 गाटा संख्या हैं, जबकि नए नंबर में मिल की जमीन के गाटों की संख्या करीब 50 हो गई है।
डीएम के निर्देश के बाद तहसील प्रशासन कानूनगो और राजस्व निरीक्षक की नौ सदस्यीय टीम गठित कर पुराने और नए नंबरों का मिलान करने में जुटा है। राजस्व विभाग की तरफ से चल रही शुरुआती जांच में पुराने नंबर के अनुसार पडरौना चीनी मिल की जमीन पडरौना के अलावा विशुनपुरा में जमीन मिली है।
यह कुल जमीन 165.47 एकड़ है, लेकिन नए नंबर में मिल की कुल 25 एकड़ जमीन ही दर्ज है, जिस पर मिल का कब्जा भी दिखा रहा है। अब राजस्व टीम पुराने और नए नंबरों का मिलान कर मिल के नाम से गायब करीब 140 एकड़ जमीन की तलाश में जुटी है।