फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सता संग्राम पेज के लिए प्रस्तावित.....

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो
विज्ञापन


पानी हुआ जहरीला, प्रशासन को दिख रहा न नेता को
कुशीनगर में गैस, आंखों में इंफेक्शन, डायरिया, त्वचा संबंधी रोगों से बढ़ी परेशानी
प्वाइंटर
- जिले के 641 गांव इंसेफेलाइटिस से प्रभावित
- 19 पुरवों के पानी में मिल रहा आर्सेनिक
- 206 पुरवों के पानी में आयरन की अधिकता
राकेश कुमार गौंड़
पडरौना (कुशीनगर)। जिले में शुद्ध पेयजल के लिए हाहाकार मचा है। कई गांवों में लगे इंडिया मार्क टू हैंडपंप के पानी में आर्सेनिक, वैक्टीरिया पाए जा रहे हैं। दूषित पानी का ही यह दुष्प्रभाव है कि 641 गांव इंसेफेलाइटिस प्रभावित हैं। 206 पुरवों के पानी में आयरन की अधिकता और 19 पुरवों में आर्सेनिक पाया जा रहा है। इंसेफेलाइटिस और जलजनित बीमारियों की चपेट में आने से कई मौतें हो चुकी हैं। ज्यादातर लोग पानी खरीदकर पीने को विवश हैं, लेकिन प्रशासन को छोड़िए, जनप्रतिनिधियों को भी इसकी फिक्र नहीं। चुनाव आया है तो कुछ सहानुभूति लेने के लिए यह मुद्दा भले ही उठा लें पर हकीकत तो यह है कि इसे लेकर कोई गंभीर नहीं।
जलनिगम के सर्वे में भी पाया गया है कि यहां के पानी में आयरन, आर्सेनिक, वैक्टीरिया की अधिकता पाई जा रही है। सेवरही, तमकुही, नेबुआ नौरंगिया, कसया और हाटा ब्लॉक के 19 पुरवों में आर्सेनिक भी पाया जा रहा है। 10 साल पहले तक यहां के पानी में क्लोराइड भी बहुतायत पाया जाता रहा है। जलनिगम और स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि कुशीनगर के भूगर्भ जल की प्रथम लेयर दूषित हो चुकी है। इसी वजह से शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। रामकोला कस्बा के मथुरा नगर, पिड़ारी और कप्तानगंज के झझवा (अब एकलव्य नगर) में चीनी मिलों के दूषित पानी के चलते लोग अक्सर बीमार रहते हैं।
विज्ञापन


जिले में पेयजल परियोजनाओं की स्थिति

पूर्व में संचालित पाइप परियोजनाएं 90
ग्राम पंचायतों की देखरेख में संचालित परियोजनाएं 16
निर्माणाधीन 71 परियोजनाओं में 58 पूर्ण (38 संचालित, 20 में विद्युतीकरण बाकी)
विश्व बैंक के सहयोग से बनी पेयजल परियोजनाएं 19
राज्य ग्रामीण पाइप पेयजल परियोजना से बने ओवरहेड टैंक 02
अधूरी परियोजनाओं के लिए 193 करोड़ रुपये की दरकार
इंडिया मार्क टू हैंडपंप- 51600

क्या कहते हैं डॉक्टर
यहां के पानी के चलते लोगों में कब्ज, उदर, डायरिया और त्वचा संबंधी रोग का दुष्प्रभाव अधिक है। आर्सेनिक से शरीर में खून की कमी, स्नायु तंत्र प्रभावित हो सकता है। हानिकारक वैक्टीरिया और वायरस टायफाइड, इंसेफेलाइटिस और आंखों में इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं। फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है। - डॉ. राजीव कुमार मिश्र, फिजिशियन, पडरौना
विज्ञापन


भूगर्भ जल में आर्सेनिक, आयरन और वैक्टीरिया की अधिकता पाई जा रही है। इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। टेंपो पर बोतलों में बिक रहा आरओ का पानी भी सुरक्षित नहीं है। इसे साफ-सुथरा और मीठा बनाने के लिए टीडीएस (टोटल डिसाल्व सॉलिड) घटा दिया जा रहा है। इससे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इसका असर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ सकता है। जार की नियमित सफाई भी नहीं की जाती। -पारसनाथ प्रसाद, सहायक अभियंता, जल निगम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें