पडरौना। कुशीनगर जिले को वजूद में आए 24 साल गुजर जाने के बावजूद यहां के कैदियों के लिए जिला कारागार नहीं बन सका है। यह साल भी गुजरने को है, लेकिन जिला प्रशासन और देवरिया के जेल प्रशासन की ओर से सारी कोशिशें करने के बावजूद इस वर्ष जिला कारागार बनने की दिशा में कोई पहल होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। हालांकि डीएम की ओर से कुशीनगर में जिला कारागार के लिए जमीन चिह्नित करने के साथ ही शासन को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है। देर बस किसानों की जमीन का मुआवजा मिलने और उनकी जमीन जेल के नाम दर्ज कराने में है। यह प्रक्रिया शासन पर लंबित है।
कुशीनगर जिले के तकरीबन 950 कैदी देवरिया के जिला कारागार में हैं। यहां के कैदियों से मिलने के लिए उनके परिवारीजनों और रिश्तेदारों को मिलने के लिए 55 किलोमीटर की दूरी तय करके जाना पड़ता है, जिसमें उनका वक्त और रुपये दोनों खर्च होते हैं। कैदियों और उनके परिवारवालों की सहूलियत के लिए कुशीनगर में जिला कारागार बनाने का प्रयास वर्ष 2010 से ही चल रहा है। कैदियों के भागने या उनके साथ अनहोनी की आशंका बनी भी रहती है।
जिला कारागार के लिए पडरौना से सटे लमुहा, भटवलिया और केवलछपरा की 24.660 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। इन गांवों के जिन किसानों की जो जमीन अधिग्रहित की जानी है, उसके मुआवजे का मूल्यांकन 462964360.00 रुपये किया गया है।
जिला कारागार के संबंध में 12 अक्टूबर को शासन की ओर से दो बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई थीं, जिसके जवाब में डीएम की ओर से महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश शासन को बताया गया है कि इस जेल के लिए 56104889.00 रुपये प्राप्त हुए थे, जिसमें 3017819.00 रुपये अर्जन व्यय के रूप में खर्च हो गए थे, जबकि अवशेष 53087070.00 रुपये कुशीनगर के कोषागार में जमा हैं। दूसरे बिंदु के जवाब में डीएम की तरफ से बताया गया है कि जिला कारागार की स्थापना के लिए लमुहा, भटवलिया और केवलछपरा में स्थित कास्तकारों की 24.660 हेक्टेयर जमीन मार्च 2010 में धारा 4(1) के तहत प्रस्तावित की गई थी, लेकिन एक वर्ष के अंदर धारा 6(1) का प्रकाशन शासन स्तर से न हो पाने के कारण प्रकरण स्वत: ही कालबाधित हो गया था। इसकी सूचना शासन स्तर से 18 फरवरी 2012 को प्राप्त हुई थी और पुन: प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया था। डीएम की तरफ से यह भी बताया गया है कि जिला कारागार के संबंध में विस्तृत आख्या तैयार कर शासन को भेज दी गई है।
बहरहाल, डीएम की ओर से जिला कारागार के संबंध में सभी औपचारिकताएं पूरी कर शासन को भेज दी गई हैं। अब वहां किसानों की जमीन के लिए मुआवजे की धनराशि और अन्य निर्देश मिलने की देर है। जिला कारागार देवरिया के अधीक्षक ने इस वित्तीय वर्ष के अंत तक जिला कारागार बनाए जाने की दिशा में कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई है। इस संबंध में डीएम डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जिला कारागार की जमीन के अधिग्रहण के लिए हमारे स्तर से प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जिला कारागार के लिए चिह्नित जमीन के अधिग्रहण से पहले किसानों को मुआवजा देने की खातिर शासन से धन की मांग की गई है। अब यह मामला शासन स्तर पर प्रक्रियाधीन है।
जिला कारागार के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। इसका खुद मौके पर जाकर अवलोकन किया गया है। किसानों को मुुआवजा देने के लिए शासन से धन मिलने की देर है। शेष औपचारिकताएं कुशीनगर के जिला प्रशासन ने पूरी कर ली हैं। धन मिलने के बाद किसानों को मुआवजा देकर उनकी जमीन जिला कारागार के नाम दर्ज कराई जाएगी, तब निर्माण शुरू हो सकेगा। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक इस दिशा में काम आगे बढ़ने की उम्मीद है।
दिलीप कुमार पांडेय, जेल अधीक्षक, देवरिया।
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