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यूपी-बिहार बॉर्डर के गांवों का फिर हो सीमांकन

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कुशीनगर। गंडक नदी के किनारे बसे यूपी व बिहार प्रांत के करीब 60 गांवों का फिर से सीमांकन कराने के लिए कुशीनगर के डीएम ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाले इन गांवों की करीब एक लाख आबादी को केवल सीमा संबंधी दिक्कतों के चलते न तो समय से राहत सामग्री मिल पाती है और न ही बचाव कार्य हो पाता है। इसके अलावा पूरे साल यहां के लोगों को आगलगी, बीमारी व अन्य घटनाओं के वक्त भी समय से मदद नहीं मिल पाती है। प्रशासनिक दिक्कतों के चलते ही इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी बेहद खराब है।
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कुशीनगर जिले के उत्तरी छोर की करीब 80 किलोमीटर लंबी सीमा बिहार प्रांत से सटी है। गंडक नदी दोनों प्रांतों के बीच सीमा रेखा का कार्य करती है। लगभग 60 गांव नदी के दियारा में बसे हैं जिनमें से 20 गांव कुशीनगर और अन्य जिले बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में आते हैं। हर साल जून के तीसरे सप्ताह से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरा इलाका बाढ़ प्रभावित रहता है। दिक्कत यह है कि खड्डा तहसील की सात ग्राम पंचायतों नरायनपुर, हरिहरपुर, मरचहवा, शिवपुर, शाहपुर, महदेवा व सालिकपुर तथा भैंसहां ग्राम पंचायत के बाल गोविंदछपरा समेत 16 टोले गंडक नदी के उत्तर तरफ बसे हैं। इन गांवों में जाने के लिए छितौनी-बगहा रेल पुल पार करके वाल्मीकि नगर के जंगल या फिर अन्य कच्चे रास्तों का उपयोग करना पड़ता है। बरसात होते ही इस रास्ते पर भी आवागमन बंद हो जाता है। सामान्य दिनों में भी खड्डा से इन गांवों तक पहुंचने के लिए करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। यही स्थिति बिहार के सेमरा लबेदहा पंचायत के गांव श्रीपतनगर, भैंसहिया, मझरिया, कतकी आदि गांवों की है। नदी के दक्षिण तरफ स्थित बिहार प्रांत के ये गांव कुशीनगर जिले के गांवों से सटे हैं और दैनिक जरूरत के लिए भी यहां के लोग कुशीनगर जिले के बाजार व अस्पताल पर निर्भर हैं। इस बार गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने पर बिहार प्रांत के गाइड बांध व पिपरा-पिपरासी बांध टूटने का सर्वाधिक असर यूपी के खड्डा व तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के गांवों में पड़ा और एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग अब भी परेशान हैं।
डीएम आंद्रा वामसी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में इन दिक्कतों का जिक्र करते हुए अनुरोध किया है कि अगर सीमांकन कराकर नदी के उत्तर तरफ स्थित गांवों को बिहार तथा दक्षिण तरफ स्थित गांवों को यूपी प्रांत में शामिल कर लिया जाए तो न सिर्फ बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल मदद पहुंचाई जा सकती है, बल्कि बांधों के रखरखाव से लगायत नदी के किनारे बसे गांवों में सड़क, बिजली, पानी, सफाई आदि का बंदोबस्त कराने तक में सहूलियत होगी। डीएम आंद्रा वामसी ने बिहार के पश्चिमी चंपारण के डीएम से भी इस मुद्दे पर वार्ता की है। डीएम का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में रुचि दिखाते हुए विचार करने की बात कही है।
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