कसया। थाई बुद्धिस्ट मोनास्ट्री की अगुवाई में आयोजित दसवीं तीन दिवसीय पवित्र बुद्ध धातु शोभा यात्रा रविवार को संपन्न हो गई। इसमें थाईलैंड से आए बौद्ध अनुयायी और बौद्ध भिक्षु शामिल हुए। महापरिनर्वाण मंदिर से निकलकर पवित्र हिरण्यवती नदी के किनारे स्थित रामाभार स्तूप पहुंची शोभा यात्रा का बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने विशेष पूजा की।
सुबह साढ़े सात बजे से महापरिनिर्वाण मंदिर से रामाभार स्तूप के लिए निकाली गई शोभायात्रा में आकर्षक वेश-भूषा में थाई कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान भगवान बुद्ध के उपदेश गूंज रहे थे। यात्रा माथा कुंवर मंदिर और राजकीय बौद्ध संग्रहालय से होकर शोभायात्रा रामाभार स्तूप पहुंची।
यहां बौद्ध भिक्षुओं और थाईलैंड के मेहमान, अनुयायी व पर्यटकों ने स्तूप की परिक्रमा की। उसके बाद कैंडल जलाने और विशेष पूजा पाठ कर यात्रा का समापन हुआ। इस दौरान पर डॉ. पी खोमसान, एबी ज्ञानेश्वर, भंते महेंद्र, भंते नंदरतन, पी सोंगक्रान, टीके राय, जितेंद्र राय, अंबिकेश त्रिपाठी, ओमप्रकाश कुशवाहा, विवेक, अमिताभ त्रिपाठी, किरन सिंह, आदित्य राय आदि मौजूद रहे।
अंतिम संस्कार से जुड़ी है शोभा यात्रा
बौद्ध अनुयायी धातु शोभायात्रा को भगवान बुद्ध के अंतिम संस्कार से जोड़कर देखते हैं। पहले दिन थाई मंदिर से शोभायात्रा निकालकर महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा पाठ होती है। अनुयायियों का कहना है कि मुख्य मंदिर की जगह भगवान बुद्ध को महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था। उनका अंतिम संस्कार रामाभार झील के निकट हुआ था। पवित्र धातु शोभायात्रा में उनकी अस्थियों को कांच के जार में रामाभार स्तूप ले जाया जाता है। यहां पूजा पाठ कर फिर मंदिर में लाकर सुरक्षित रख दिया जाता है।