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पेश की सहृदयता की मिसाल

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नहीं लिया दहेज, दवा के लिए 20 हजार रुपये भी दिए
- जिले की सीमा से सटे बिहार के सिताब दियारा गांव का मामला
- आठ दिन पहले शादी वाले घर में लग गई थी आग, सब कुछ जलकर हो गया था नष्ट
- आग बुझाने में झुलस गए ते पिता-माता व भाई-बहन, जिला अस्पताल में चल रहा इलाज

हेमंत मधूप
दुदही (कुशीनगर)। जिले की सीमा से सटे बिहार के सिताब दियारा गांव में सोमवार की रात आई बारात में वर पक्ष ने सहृदयता और रिश्तों की नई मिसाल पेश की। जिस घर में बारात आई थी, वहां आठ दिन पहले आग लग गई थी, जिससे सारा सामान जलकर राख हो गया था। इतना ही नहीं आग बूझाने की कोशिश में लड़की के माता-पिता व भाई-बहन झुलस गए थे। इसकी जानकारी होने पर वर के पिता ने दहेज लेने से इनकार कर दिया। साथ ही उसने लड़की के घर वालों के इलाज के लिए अपने पास से 20 हजार रुपये दिए।
बिना दहेज के हुई यह शादी आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गई है। लोग लड़के के पिता की तारीफ कर रहे हैं। हर कोई कह रहा है कि रिश्तेदार हो तो ऐसा। बिहार के धनहा थाना क्षेत्र का गांव सिताब दियारा दुदही बाजार से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर है। गंडक नदी के किनारे बसे इस गांव के रहने वाले बंसत चौहान की बेटी भागमनी की शादी गोपालगंज जिला निवासी जय कुमार से तय हुई थी। 18 जून को तिलक था। 17 जून को बंसत के घर मिठाई बन रही थी। रसोई गैस सिलेंडर से आग लग गई, जिसमें बसंत समेत गांव के 18 लोगों का का घर जल गया। बंसत के घर में शादी के लिए रखे डेढ़ लाख रुपये समेत अन्य सभी सामान जलकर राख हो गए। सामान बचाने के प्रयास में बंसत और पत्नी सावित्री के अलावा पुत्र भुवाल और बेटी नीता झुलस गए। चारों को कुशीनगर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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शादी वाले घर में केवल भागमनी सुरक्षित बची थी। 25 जून को इसकी शादी थी, लेकिन घर में न तो लड़के वालों को देने के लिए कोई सामान बचा था और न ही घर का कोई सदस्य मौजूद था। गांव के अध्यापक संजय सिंह ने कन्यादान का निर्णय लिया। बसंत के बड़े भाई मोतीचंद व कुछ अन्य लोगों ने बारातियों के लिए नाश्ता-भोजन आदि का इंतजाम किया। सोमवार की शाम को तय समय पर बरात आई तो उसमें दूल्हा जय कुमार समेत मात्र 12 लोग ही थे। वर पक्ष ने बिना किसी दान दहेज के शादी की रस्म पूरी कराई। दूल्हा जय कुमार और दुल्हन भागमनी को गांव वालों ने विदा किया। इसके साथ ही जय कुमार के पिता ने भागमनी के माता-पिता व भाई-बहन के इलाज के लिए 20 हजार रुपये अपने पास से दिए। दहजे लोभी समाज में वर पक्ष की इस सहृदयता ने पूरे गांव का दिल जीत लिया।
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