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ड्रेस, किताबों का वितरण और एमडीएम की स्थिति भी खराब

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कुशीनगर। परिषदीय विद्यालयों को बेहतर बनाने की उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा को शीर्ष अदालत के फैसले के बाद तगड़ा झटका लगा है। समायोजित तथा अवशेष शिक्षा मित्रों के आंदोलन के साथ ही ड्रेस और किताबें नहीं बंटने तथा मध्याह्न भोजन निधि का धन खातों में नहीं आने से व्यवस्था और बिगड़ती जा रही है। सबसे खराब स्थिति उन 115 विद्यालयों की है, जहां समायोजित अध्यापक तैनात थे। वहां एमडीएम की व्यवस्था भी करने वाला कोई नहीं है। आलम यह है कि जनपद में कई विद्यालय बंद पड़े हैं, वहीं जो खुले भी हैं वहां भी पठन - पाठन का माहौल नहीं बन पा रहा है।
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शीर्ष अदालत ने 25 जुलाई को अपने फैसले में प्रदेश में तैनात एक लाख सैंतीस हजार समायोजित शिक्षा मित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन रद्द कर दिया था। उसके बाद से ही समायोजित शिक्षा मित्र आंदोलनरत हैं। कुशीनगर के 2179 प्राथमिक विद्यालयों में करीब सात हजार अध्यापक तैनात हैं। जिसमें 2826 शिक्षा मित्र थे। उनमें से 2484 शिक्षा मित्रों को पूर्ववर्ती सपा सरकार ने दो चरणों में सहायक अध्यापक के रूप में समायोजित कर दिया था। जनपद के विभिन्न विकास खंडों के 115 विद्यालयों में केवल समायोजित शिक्षक ही पढ़ा रहे थे। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद इन विद्यालयों में पढ़ाई पूरी तरह ठप है। पडरौना के 15 प्राथमिक विद्यालय, सेवरही के 14, तमकुही के 12, दुदही के 11 विद्यालयों सहित सभी विकास खंडों में प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे हर दिन आने के बाद वापस लौट जा रहे हैं।
विभाग किसी तरह अगल बगल के शिक्षकों से इन विद्यालयों को खोलने की जुगत तो कर रहा है, लेकिन बच्चों की उपस्थिति और शिक्षण कार्य दोनों प्रभावित हो रहा है। सरकार के कड़े रुख के चलते सत्र 2017-18 में विद्यालयों में बच्चों की चहल पहल काफी बढ़ गई थी। गत वर्ष की तुलना में बच्चों के नामांकन और उपस्थिति में भी काफी सुधार हुआ था। नतीजा सरप्लस अध्यापकों को कम अध्यापकों वाले विद्यालयों में समायोजित करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में थी। अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्था पटरी से उतर गई है। सरकार का 15 जुलाई तक ड्रेस वितरण का आदेश भी आधा अधूरा ही पूरा हो सका है। क्योंकि कई विद्यालयों का खाता संचालन समायोजित शिक्षक ही करते थे। कई स्कूलों में कपड़ा मिल मालिकों के हड़ताल और नए ड्रेस के चलते यूनिफार्म की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नतीजतन अभी तक आधे बच्चों को भी नई यूनिफार्म नहीं मिल पाए हैं। पुस्तकों के प्रकाशन में विलंब के चलते जनपद के विद्यालयों करीब 50 लाख किताबों के सापेक्ष केवल सवा लाख किताबें ही बांटी जा सकी हैं। मार्च के बाद कन्वर्जन कास्ट नहीं आने से अध्यापक और ग्राम प्रधान एमडीएम भी नहीं बनवा रहे हैं। सबसे खराब स्थिति उन 115 विद्यालयों का है, जहां समायोजित अध्यापक तैनात थे। वहां एमडीएम की व्यवस्था भी करने वाला कोई नहीं है। इस संबंध में बीएसए हेमंत राव का कहना है कि सभी बीईओ को निर्देशित किया गया है कि अन्य विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों से विद्यालय खुलवाए जाएं। शासन के अगले निर्देश तक यह व्यवस्था जारी रहेगी।
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