रामपुर बुजुर्ग (कुशीनगर)। जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुंडेरा उपाध्याय गांव में रविवार को एक महिला ने ममता की मिसाल पेश की। यहां एक नवजात को जन्म देने वाली मां ने मरने के लिए बांस के झुरमुट में फेंक दिया था। जिसे दुर्गावती नामक एक महिला ने कलेजे से लगा लिया है। उसने नवजात को अपने बेटे की तरह पालने का फैसला किया है।
मुंडेरा उपाध्याय गांव के कैलाश सिंह के घर के सामने बांस का झुरमुट है। उसके बगल में ही जामुन का पेड़ है। रविवार सुबह कुछ लोग वहां जामुन तोड़ रहे थे, तभी बांस के झुरमुट से किसी नन्हे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। लोग वहां पहुंचे तो देखा कि पत्तों के ढेर के बीच एक नवजात पड़ा है। थोड़ी ही देर में बात पूरे गांव में फैल गई और नवजात को देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोग बच्चे को देखकर तरह-तरह की बातें करने लगे, लेकिन किसी ने आगे बढ़ कर उसे नहीं उठाया। इसी दौरान भीड़ के बीच से निकलकर दुर्गावती नामक महिला नवजात के पास पहुंचे और उसे उठाकर कलेजे से लगा लिया। महिला ने भीड़ के सामने ही एलान किया कि वह इस नवजात को अपने बेटे की तरह पालेगी। इसके बाद महिला बच्चे को लेकर हाटा सीएचसी पहुंची और डॉक्टर को दिखाया। चिकित्सक द्वारा बच्चे की हालत ठीक बताने पर वह उसे लेकर घर आ गई। मुंडेरा उपाध्याय गांव में दुर्गावती का मायका है। वह हाटा कस्बे के वार्ड नंबर 13 स्वामी विवेकानंद मोहल्ला की रहने वाली है।
बच्चे को घर लाने के बाद दुर्गावती बोली कि उसकी बेटे की हसरत पूरी हो गई। दरअसल, दुर्गावती की आठ बेटियां हैं, लेकिन बेटा नहीं है। उसने कहा कि बड़ी हसरत थी कि एक बेटा होता, जिसे भगवान ने आज इस तरह से पूरी कर दी। दुर्गावती ने बताया कि उसकी तीन बेटियों की शादी हो गई है।