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जानिए, कौन हैं दुर्गा को निलंबित कराने वाले भाटी

Sat, 03 Aug 2013 08:12 AM IST
ग्रेटर नोएडा/दिलीप चतुर्वेदी
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यह पहला मौका नहीं है, जब नरेंद्र भाटी ने प्रदेश में सपा की सरकार रहते अपनी ताकत दिखाई है। इससे पूर्व उन पर लगे हत्या के प्रयास के एक मुकदमे को भी सरकार वापस करा चुकी है।
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आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबित कराने और अवैध खनन कराने वालों से जुड़े रहने के आरोपों में भाटी इस समय घिरे हुए हैं।

वैसे जब भी समाजवादी पार्टी की सरकार आती है, नरेंद्र भाटी का नोएडा में जबरदस्त रुतबा रहता है। विधायक रहें या नहीं, लेकिन उनकी ताकत मंत्री से कम नहीं रहती।

'मैंने 41 मिनटों में दुर्गा को सस्पेंड कराया'

इस बार भी वह विधायक नहीं हैं, लेकिन दर्जा कैबिनेट मंत्री का मिला हुआ है। वह यूपी एग्रो के चेयरमैन हैं और नोएडा में उनकी लाल बत्ती के आगे कोई टिकता नहीं है।
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1991 में भाटी पर अपराध संख्या 420/1991 पर धारा 147, 148, 149, 307, 332, 336 और 353 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। 2005 में जब सपा की सरकार थी तो इस मुकदमे को यूपी शासन के पत्र के बाद मामला वापस ले लिया गया।

दादरी तहसील के बोड़ाकी गांव के रहने वाले किसान प्रेम सिंह के पुत्र नरेंद्र सिंह भाटी ने बैनामा लेखक के रूप में कैरियर शुरू किया था। पांच साल दादरी तहसील में बैनामा लेखक के रूप में काम किया।

वर्ष 1982 में दादरी ब्लॉक प्रमुख बने। दूसरी बार भी वह ब्लॉक के प्रमुख रहे। दो बार ब्लॉक प्रमुख रहने के बाद उन्होंने अपना कार्य क्षेत्र सिकंदराबाद को चुना।

जनता दल के टिकट पर वह यहां से 1990 और 1991 में यहां से विधायक रहे। 1996 में सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर तीसरी बार भी सिकंदराबाद से विधायक बने। उसके बाद सपा से ही जुडे़ रहे हैं।

भाटी इसके बाद विधानसभा चुनाव नहीं जीत सके। हालांकि वह विधानसभा का चुनाव लडे़ जरूर लेकिन हार का सामना करना पड़ा।

सपा के पिछले कार्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उनको कृषि सलाहकार के रूप में मनोनीत करके मंत्री का दर्जा दिया।

2009 में गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट से सपा ने उन्हें टिकट दी, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इस बार भी सपा ने भाटी को गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

‘मेरे या मेरे परिवार के खिलाफ आज तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। 1991 में जो मुकदमा सरकार द्वारा वापस करवाया गया, वह राजनीतिक मुकदमा था। एफआईआर में मेरा नाम तक नहीं था। पुलिस ने चार्जशीट में नाम शामिल किया था। मैंने कभी नहीं कहा कि 41 मिनट में एसडीएम का तबादला करा दिया।’--नरेंद्र भाटी, चेयरमैन, यूपी एग्रो
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