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Siddique Kappan: पत्रकार सिद्दीकी कप्पन जमानत पर जेल से रिहा, देशद्रोह-हाथरस कांड में हिंसा फैलाने का था आरोप

Fri, 03 Feb 2023 12:11 AM IST
शाहरुख खान एएनआई, उत्तर प्रदेश

सार

लखनऊ की जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की जेल से रिहाई हो गई। गुरुवार की सुबह वह जेल से रिहा हुए। 23 दिसंबर को हाईकोर्ट ने सिद्दीक कप्पन को सशर्त जमानत दी थी। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश संजय शंकर पांडे ने कप्पन को एक-एक लाख रुपये की दो जमानतें और इसी धनराशि का मुचलका दाखिल करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। 
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Siddique Kappan - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीएफआई से संबंध रखने के आरोप में लखनऊ की जेल में बंद केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन की बृहस्पतिवार को 28 महीने बाद रिहाई हो गई। जेल से बाहर निकलते ही कप्पन ने कहा कि वह हाथरस में रिपोर्टिंग करने गया था। उसके पास सिर्फ दो पेन व एक नोटबुक था। इसके बावजूद पुलिस ने उसको टैक्सी चालक के साथ गिरफ्तार कर लिया।

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कप्पन का आरोप है कि जमानत मंजूर होने के बाद भी उसे जेल मे रखने के लिए जमानतदारों के सत्यापन को लटकाया गया। पता नहीं पुलिस उसे क्यों जेल मे रखना चाहती है। उसने कहा कि मेरे जेल मे रहने से किसी को क्या लाभ है मुझे नहीं पता। लेकिन, न्याय की जीत हुई। 

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खुद को बेकसूर बताते हुए कप्पन ने कहा कि उसके खाते मे कोई पैसा नहीं आया। पुलिस व ईडी ने उस पर मनी लॉन्डिंग समेत फर्जी मुकदमे दर्ज किये हैं। लिहाजा खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए वह आखिरी दम तक लड़ाई लड़ेगा। उधर, जेल के बाहर मौजूद उसकी पत्नी रिहाना और बेटा मोहम्मद मुजम्मिल उसे देखकर भावुक हो गए। दोनों कप्पन से लिपटकर रोने लगे।

कप्पन ने रिहाई के दौरान जेल प्रशासन पर धमकाने का आरोप भी लगाया है। उसने आरोप लगाया कि उससे कहा गया कि बाहर जाकर अगर कुछ भी बोला तो फिर जेल भेज दिए जाओगे। हालांकि जेल प्रशासन ने कप्पन के आरोप को गलत बताया है।

पीएफआई से मेरा कोई संबंध नही
कप्पन ने कहा कि पीएफआई से उसका कोई संबंध नहीं है। उसके खाते से कोई बड़ा लेने देन नहीं हुआ है और न ही उसके खाते में कहीं से पैसे आए हैं। हाथरस मामले में दूसरे पत्रकारों की तरह वह भी कवरेज करने गया था। उसने कहा कि उसके मोबाइल में कांग्रेस, बीजेपी समेत कई पार्टियों के तमाम नेताओं के मोबाइल नंबर थे।
 

हाथरस कांड के दौरान हुई थी गिरफ्तारी

चर्चित हाथरस कांड के दौरान कथित पत्रकार सिद्दिक कप्पन को गिरफ्तार किया गया था। कप्पन पर हवाला से धन प्राप्त कर के देश विरोधी कार्यों में प्रयोग करने समेत अन्य आरोपों का संज्ञान लेकर ईडी ने कप्पन पर कार्रवाई की थी।

जांच के दौरान पाया गया कि यूपी पुलिस ने 7 अक्तूबर 2020 को मसूद अहमद सिद्दीक कप्पन, अतिकुर रहमान और मोहम्मद आलम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उस समय गिरफ्तार किया था जब वह साम्प्रदयिक सौहार्द बिगड़ने, दंगे भड़काने और आतंक फैलाने हाथरस जा रहे थे। 

कहा गया कि आरोपी सिद्दीक कप्पन पीएफआई के मुखपत्र तेजस डेली में कार्य करता था। साथ ही आरोपी को 2015 में दिल्ली में दंगे करने के लिए नियुक्त किया गया था। आरोप है कि विवेचना में पता चला कि पीएफआई के सदस्य के रऊफ व अन्य सदस्यों को एक षड्यंत्र के तहत विदेश से 1 करोड़ 38 लाख रुपए दिए गए थे।
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कवरेज करने गया, पुलिस ने बना दिया पीएफआई का सचिव : कप्पन

पत्रकारिता एक गतिविधि है न कि अपराध। शायद यहां पत्रकार को फ्रीडम नहीं है। मैं हाथरस में कवरेज करने गया था, लेकिन पुलिस ने मुझे पीएफआई का सचिव बना दिया। इसके बाद 28 माह की जेल काटी और कॅरिअर के साथ मां को भी खो दिया। फिलहाल आरोपों के खिलाफ  संघर्ष जारी रहेगा। यह बातें कथित पत्रकार कप्पन सिद्दीक ने बृहस्पतिवार को जेल से रिहा होने के बाद कहीं। भावुक होकर कप्पन ने बताया कि बेटा केरल के प्रियदर्शनी कॉलेज मे बीसीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। उसकी पढ़ाई प्रभावित हुई तो पत्नी रिहाना ने जीविकोपार्जन के लिए काफी मुसीबतें झेलीं। उसने बताया कि जेल में रहने के दौरान उसे भाषाई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिला जेल की सर्किल दो के हाता 6 की बैरक नंबर 39 में बंद रहने के दौरान उसे मुकदमे से संबंधित जानकारी नहीं मिल पाती थी। मलयालम में उसे जेलकर्मियों से बात करने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए अंग्रेजी बोलने वाला एक राइटर दिलाने के लिए जेल प्रशासन से गुहार लगाई। इस पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक आशीष तिवारी ने जेलर व डिप्टी जेलर को निगरानी में लगाने के साथ परेड में उसकी समस्या सुनी और समाधान का आश्वासन दिया। 
संवाद
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