गंगा के बाद अब जिले में यमुना को प्रदूषण से बचाने की कवायद शुरू कर दी गई है। गंगा किनारे बसे 33 गांवों को ओडीएफ करने के बाद पंचायत राज अधिकारी की सीएलटीएस टीम अब यमुना की तराई में अभियान चलाएगी। यमुना की तराई में बसे 37 गांवों की सूची तैयार करा ली गई है। इन गांवों में शुक्रवार से एक साथ 120 टीमें अभियान चलाकर ग्रामीणों को खुले में शौच से रोकेंगी और शौचालय से होने वाले फायदे की जानकारी देकर उन्हें बनवाने के लिए प्रेरित करेंगी।
दोआबा के गंगा की तराई में बसे 33 गांवों को पंचायती राज विभाग ने ओडीएफ करने के लिए गंगा एक्शन प्लान में शामिल किया था। दो अक्टूबर 2014 को एक्शन प्लान के तहत 33 गांवों में दस हजार से अधिक शौचालय की रकम भेजकर निर्माण शुरू कराया गया। अब इन गांवों के एक-एक घर में शौचालय बन चुका है। गंगा एक्शन प्लान के तहत 33 गांव पूर्ण रूप से ओडीएफ होने के बाद पंचायती राज विभाग यमुना किनारे कूद पड़ा है। डीपीआरओ के निर्देश पर सरसवां, कौशाम्बी और नेवादा ब्लॉक के 37 गांवों को ओडीएफ करने के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें पभोषा, मेहवाघाट, गुरौली, बेरौंचा, गढ़वा, उमरवल, मल्हीपुर आदि गांव शामिल हैं। इन गांवों में ओडीएफ अभियान चलाने के लिए डीपीआरओ ने 120 टीमें गठित कर दी हैं। इसमें 60 टीमें पुरानी और 60 नई शामिल हैं।
शौचालय की धनराशि देने के लिए बनेगी सूची
यमुना की तराई में बसे गांवों में ओडीएफ अभियान चलाने के लिए शुक्रवार से टीमें पहुंचेगी। जिनके घरों में शौचालय नहीं है उन्हें हाथ में लोटे के साथ खुरपी, फावड़ा लेकर जाने के लिए निर्देशित किया जाएगा। इसके अलावा दिन में सीएलटीएस टीम के सदस्य घर-घर जाकर ऐसे गरीबों की सूची तैयार करेंगे जिनके आशियाने कच्चे हैं। ऐसे लोगों की सूची तैयार करने के बाद डीपीआरओ को मुहैया कराई जाएगी। सूची मिलने के बाद डीपीआरओ गरीबों को 12 हजार की दर से शौचालय निर्माण के लिए धनराशि मुहैया कराएंगे।
गंगा एक्शन प्लान की तर्ज पर यमुना किनारे बसे गांवों को ओडीएफ किया जाना है। इसके लिए 120 टीमें गठित कर दी गई हैं। शुक्रवार से टीमें निर्धारित गांवों में पहुंचकर अभियान को अंजाम देना शुरू कर देंगी।
कमल किशोर, डीपीआरओ, कौशाम्बी