काैशाम्बी। कड़ाधाम स्थित श्री कालेश्वर नाथ महादेव मंदिर में स्थापित खंडित शिवलिंग की पूजा करने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि इस शिवलिंग के दर्शन और गंगा जल से अभिषेक करने से भक्तों के गृह क्लेश दूर हो जाते हैं।
मंझनपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर स्थित कड़ा धाम में कालेश्वर नाथ महादेव मंदिर है। यहां के पुजारी देवी शरण ने बताया कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दाैरान पांडव यहां रुके थे। इस दाैरान धर्मराज युधिष्ठिर ने शिवलिंग की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कि सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर पर मुगलों ने हमला किया था। आरोप है कि इस दाैरान मुगलों ने शिवलिंग को नष्ट करने का प्रयास किया जिससे शिवलिंग खंडित हो गया।
मंंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि मुगल शासक औरंगजेब की सेना ने तलवार से शिवलिंग पर जैसे ही पहली बार हमला किया तभी शिवलिंग से दूध की धारा निकलने लगी। दोबारा हमला करने पर मधुमिक्खयों का झुंड निकला और सेना पर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में मधुमिक्खयों के हमले से पूरी सेना भाग खड़ी हुई। तभी से लोगों की आस्था और बढ़ गई। दूर-दूर से लोग यहां आने लगे।
बताया जाता है कि युधिष्ठिर ने गंगा तट पर शिविलंग की स्थापना कर गंगाजल से अभिषेक किया था। इससे उनके गृह क्लेश शांत हुए थे। तभी से यह मान्यता है कि यहां शिविलिंग का दर्शन करने और गंगाजल से अभिषेक करने से गृह क्लेश शांत होते हैं।
सावन में लगती है भक्तों की भीड़
मंदिर के पुजारी ने बताया कि वैसे तो यहां पूरे वर्ष लोग दर्शन के लिए आते हैं लेकिन सावन के महीने में दर्शन पूजन का विशेष महत्व है। देश-प्रदेश से लोग मनवांछित फल की प्राप्ति के लिए यहां आकर रूद्राभिषेक करवाते हैं।