फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

माता के महागौरी स्वरूप का किया गया पूजन

विज्ञापन
Worshiping of Mahagauri form of Mother - फोटो : KAUSHAMBI
विज्ञापन
माता के महागौरी स्वरूप का किया गया पूजन
विज्ञापन

मंझनपुर। नवरात्र के आठवें दिन रविवार को भक्तों ने मां के महागौरी स्वरूप का शृंगार किया। मंदिरों व पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं ने मां के इसी स्वरूप के दर्शन-पूजन किए। कड़ा स्थित शीतला धाम में भी रविवार को भक्तों ने हाजिरी लगाई।
विज्ञापन

शारदीय नवरात्र का व्रत व पूजन 29 सितंबर दिन रविवार को प्रतिपदा से प्रारंभ हुआ। मां के कुछ भक्त नौ दिन का व्रत रखते हैं तो कुछ प्रतिपदा व अष्टमी को व्रत रखकर नवमी को परायण कर देते हैं। इसके चलते नवरात्र अष्टमी के व्रत और पूजन का विशेष महत्व है। मां अंबे का आठवां स्वरूप महागौरी का माना जाता है। पुराणों के अनुसार माता महागौरी सौभाग्य, धन, संपदा, सौंदर्य और स्त्री गुणों की अधिष्ठात्री होती हैं। मान्यता है कि रक्तबीज का संहार करने के लिए मां दुर्गा ने काली का रूप धारण किया था। उसका वध करने के बाद उनका क्रोध शांत नहीं हो रहा था। इस पर उनके रास्ते में लेटकर भगवान शिव ने उनका क्रोध शांत कराया। इसके बाद गंगा जल छिड़का तो मां ने महागौरी रूप धारण किया। इन्हें सृष्टि का आधार व अक्षत सुहाग का प्रतीक भी कहा है। विवाहित महिलाओं द्वारा इनकी पूजा अर्चना विशेष फलदाई होती है। रविवार को मां के इसी स्वरूप का पूजन-अर्चन करने के लिए देवी मंदिरों, पूजा पंडालों में सुबह से भक्तों की भीड़ लगी रही। मंझनपुर कस्बा स्थित दुर्गा मंदिर, संचवारा व किशनपुर अंबारी गांव स्थित मां अलोपशंकरी मंदिर, पश्चिम शरीरा स्थित झारखंडी देवी मंदिर, गुरौली के चंद्रिका देवी मंदिर, कनैली के शीतला माता मंदिर में भक्तों ने विधिविधान से देवी पूजन किया। वहीं शीतला धाम कड़ा में मां के आठवें स्वरूप का दर्शन-पूजन करने के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों से भी भक्त पहुंचे। यहां आने वाले अधिकतर भक्तों ने पहले गंगा स्नान किया फिर जयकारा लगाते हुए मां के दरबार में हाजिरी लगाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें