मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी व्यक्ति के जीवन और पारिवारिक संबंधों पर भारी पड़ सकती है। मानसिक रोगों से हार नहीं माननी चाहिए क्योंकि सही इलाज से जिंदगी में सुधार संभव है। लगातार उदासी, नींद में परेशानी, चिड़चिड़ापन और व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और उचित उपचार से मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यह बातें मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नितेश सिंह ने बताई।
उन्होंने बताया कि मानसिक बीमारी कमजोरी नहीं है। ऐसे मरीजों को उपचार के साथ परिवार और समाज के सहयोग की जरूरत होती है। मानसिक परेशानी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
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उपचार से अवसाद में मिली राहत
मूरतगंज निवासी 32 वर्षीय महिला करीब छह महीने पहले लगातार उदासी, नींद में परेशानी, भूख कम लगने और रोजमर्रा के कामों में रुचि घटने की शिकायत लेकर मनोचिकित्सा विभाग पहुंचीं। चिकित्सकीय जांच में अवसाद की पहचान हुई। इसके बाद उपचार और परामर्श शुरू किया गया। परिवार को भी महिला का सहयोग करने के लिए जागरूक किया गया। नियमित उपचार से उनकी मनोदशा, नींद और दैनिक कार्यक्षमता में सुधार हुआ।
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सिजोफ्रेनिया से पीड़ित युवक की हालत सुधरी
मंझनपुर निवासी 23 वर्षीय युवक को करीब आठ महीने पहले दूसरों पर संदेह करने और ऐसी आवाजें सुनाई देने की समस्या होने पर अस्पताल लाया गया, जिन्हें दूसरे लोग नहीं सुन पाते थे। चिकित्सकीय मूल्यांकन में सिजोफ्रेनिया की पहचान हुई। चिकित्सकों ने दवाइयां शुरू करने के साथ युवक और उसके परिवार की काउंसलिंग की। नियमित उपचार और परामर्श से उसके लक्षणों में सुधार हुआ और दैनिक गतिविधियां भी बेहतर होने लगीं।
वर्जन
पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और अपनों से बातचीत मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मददगार हैं। मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को डांटने या दोष देने के बजाय उसकी बात सुननी चाहिए। समय पर उपचार, नियमित दवाइयां और परिवार का सहयोग मरीज को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद कर सकता है। नितेश सिंह, मनोरोग विशेषज्ञ