पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या आज मनाई जाएगी। इस अवसर पर लोग विधि-विधान से पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण कर उन्हें विदाई देंगे। घरों में पितरों के निमित्त पूजा-अर्चना के साथ ब्राह्मण भोज और दान-पुण्य भी किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त कर्म करने से परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।
भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलने वाले पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को सर्वपितृ अमावस्या या पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद नहीं है या किसी कारणवश पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, वह इस दिन उनका श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं।
आचार्य पंडित दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि शास्त्रों में सर्वपितृ अमावस्या पर सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धापूर्वक पूर्वजों का स्मरण करने, ब्राह्मण भोज कराने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों की प्रसन्नता से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए लोग इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान कर पितृ पक्ष का समापन करेंगे।
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पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि नौ अक्तूबर की रात 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्तूबर की रात 9:19 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या का पर्व 10 अक्तूबर 2026 को मनाया जाएगा।
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सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
यह पितृ पक्ष की अंतिम तिथि होती है। इस दिन उन सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका किसी कारण से नियमित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन ज्ञात और अज्ञात सभी पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है।