जॉब कार्डधारक मजदूरों के लिए मनरेगा छलावा साबित हो रही है। जिले की कई ऐसी ग्राम सभाएं हैं, जहां मनरेगा के तहत मजदूरों का फावड़ा दस माह से नहीं उठा। गांव में काम न मिलने से मजदूर गैर जनपद में रोजी कमाने के लिए मजबूर हैं। ग्राम प्रधान हैं कि वह भी मजदूरों को काम दे पाने में हाथ खड़े कर रहे हैं।
विकास खंड कौशाम्बी के कोषम इनाम गांव की आबादी दस हजार है। इस गांव में मनरेगा के पंजीकृत मजदूरों की संख्या 918 है। इन मजदूरों को दस माह से गांव में काम नहीं मिल सका। गांव के बुदुन निषाद, सरपंची निषाद, बसंत निषाद सहित सैकड़ों मजदूरों का आरोप है कि दस माह पहले गांव में विजिया तालाब की खुदाई कराई गई थी। इसका भुगतान सात माह बाद हुआ। भुगतान देर से होने के कारण ग्राम प्रधान ने मनरेगा का काम कराना बंद कर दिया। गांव में रोजगार देने की गारंटी वाली मनरेगा में काम न मिलने से जॉब कार्ड धारक मजदूर गैर जनपद में रोजी कमाने के लिए पलायित हो गए हैं। कोई मजदूरी कर रहा है तो कोई रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पाल रहा है। जिम्मेदार हैं कि केंद्र की प्राथमिकता में शामिल मनरेगा के तहत काम नहीं लगवा रहे हैं। गांव में काम न मिलने से जॉबकार्ड धारक मजदूरों का कुनबा भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है।
गांव में मनरेगा का काम जून 2016 से बंद है। जून में विजिया तालाब की खुदाई का मजदूरी भी सात माह बाद मिली। दस माह में कहीं काम न लगने से मजदूरों को रोजी कमाने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।
बुदुन निषाद, कोषम इनाम
मनरेगा में काम करने के बाद मजदूरों को भुगतान के लिए भटकना पड़ता है। इसके चलते कुछ मजदूरों का मन मनरेगा से रूठ गया है। दूसरी ओर काम न शुरू कराए जाने से मजदूर अन्य जनपदों में रोजी कमाने निकल गए हैं।
सरपंची निषाद, कोषम इनाम
मनरेगा में दस माह से काम बंद होने से मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुंच गया था। बालू बंद होने से गांव में भी काम नहीं हो रहा है। इसके चलते मजदूरों का गैर जनपद जाना मजबूरी हो गई है।
बसंत लाल निषाद, कोषम इनाम
जून 2016 में कराए गए काम की मजदूरी शासन स्तर पर फंस गई थी। मजदूर आए दिन भुगतान को लेकर दरवाजे पर खड़े रहते थे। सात माह बाद किसी तरह भुगतान हुआ तो मजदूरों ने राहत की सांस ली। भुगतान में देरी होने की वजह से काम कराने की हिम्मत नहीं पड़ती।
शिवपूजन यादव, ग्राम प्रधान