नोटबंदी को 50 दिन पूरा हो गया है, इसके बाद भी लोगों का हर काम अभी अधूरा है। जैसे-तैसे लोग काम निपटा रहे हैं। नगदी संकट का असर यह है कि लोग अपनी उपज व्यापारियों को नहीं बेच पा रहे हैं। बाहर से आढ़तियों की डिमांड ही नहीं आ रही है। लगभग डेढ़ लाख मजदूर अपने-अपने घरों में बैठे हैं। सरकारी व गैर सरकारी निर्माण कार्य ठप चल रहा है।
जिले में नगदी संकट से अब तक लोग नहीं उबर सके हैं। जिले के अधिकांश बैंकों से अभी भी ग्राहकों को 24 हजार रुपये नहीं मिल रहे हैं। व्यापारियों की भी यही स्थिति उन्हें करंट एकाउंट पर 50 हजार रुपये एकमुश्त नहीं मिल पा रहे हैं। सबसे ज्यादा ग्राहकों को परेशानी देहात इलाकों में झेलनी पड़ रही है। जिला मुख्यालय व प्रमुख बाजारों के बैंक रुपये देने लगे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी ग्राहकों से विदड्राल पर रकम बदलवाई जा रही है। नकदी संकट की वजह से मजदूरों को अभी तक काम नहीं मिला है। नोटबंदी की मार सबसे ज्यादा इसी तबके को झेलनी पड़ी है।
डेढ़ लाख से ज्यादा मजदूर अपने-अपने घराें में बैठे हैं। इनको काम नहीं मिल रहा है। यह मजदूर छटपटा रहे हैं। काम की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन काम नहीं मिल रहा है। सरकारी व गैर सरकारी निर्माण कार्य बंद चल रहे हैं। भवन निर्माण के लिए लोगों को रकम नहीं मिल पा रही है। जिला मुख्यालय में तमाम काम बंद चल रहे हैं। सरकारी कार्यों का भी यही हाल है। छोटे कारोबारी भी इसका शिकार हुए हैं। उनका कारोबार प्रभावित है। बाजार में रौनक न आने से कारोबारी दिक्कत में हैं। ईंट-भट्ठों का भी यही हाल है। भट्ठा मालिक अभी भी मजदूरों को बुलाने से परहेज कर रहे हैं। इससे हजारों की संख्या में भट्ठा मजदूर काम मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
फुटकर की समस्या जूझ रहे लोग
एटीएम इस्तेमाल करने वाले लोग फुटकर की समस्या से जूझ रहे हैं। दो हजार से ज्यादा लोगों को मिल नहीं रहा है। दो हजार रुपये निकालने पर एक गुलाबी नोट ही मिलती है। इसके बाद लोगों को सामान खरीदने के लिए पहले फुटकर का इंतजाम करना पड़ता है। इसके लिए लोगों को अतिरिक्त सामान भी खरीदना पड़ता है। फुटकर न मिलने से लोग परेशान हैं।