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मशीन पर भरोसा नहीं, सबको चाहिए नगद

Thu, 29 Dec 2016 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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बाजारों को कैशलेस करने की कवायद बैंकर्स कर रहे हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों को इस मशीन पर तनिक भी भरोसा नहीं। कारोबारियों को नगद रुपया चाहिए। ग्राहक भी कार्ड का इस्तेमाल करने से परहेज कर रहे हैं। इससे नगदी संकट बना हुआ है।
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   छोटे कारोबारियों के लिए नोटबंदी बुरा दौर लेकर आई है। बाजार को कैशलेस करने की हर संभव कोशिश बैंकर्स ने शुरू कर दी है। वह आवेदन पर ताबड़तोड़ पीओएस व स्वैप मशीन दे रहे हैं। इसके बाद भी दुकानदार इन मशीनों को लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अधिकांश दुकानों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। इसके अलावा छोटे कारोबारी नगद लेनदेन पर भरोसा करते हैं। मंझनपुर के दुकानदार इरफान का कहना है कि उनकी कपड़े की दुकान है। छोटे कारोबारी हैं। दस से 20 हजार का माल वह खरीदकर लाते हैं और उसको फुटकर में बेचते हैं।

इस सीजन नोटबंदी की वजह से दुकान में कपड़ा डंप है। कहा कि वह पीओएस मशीन लगवा सकते हैं, लेकिन समस्या यह है कि जब उन्हें यही नहीं पता है कि कब और किस समय कपड़ा खरीदने उन्हें जाना पड़ेगा तो वह बिना नगदी के परेशान हो जाएंगे। बड़े दुकानदार भी बैंकिंग प्रक्रिया से दूर भागने की कोशिश कर रहे हैं। वह भी नगद ही रुपया मांग रहे हैं। ऐसे में वह मशीन लगाकर करेंगे क्या। इसके अलावा उनके ग्राहक ऐसे हैं, जिन्हें इस मशीन के बारे में पता ही नहीं। पेटीएम क्या होता है? यह वह जानते ही नहीं। दुकानदार परमेश केशरवानी प्रतिदिन से तीन से चार हजार रुपये का कारोबार करते हैं। इसके बाद भी वह पीओएस मशीन नहीं लगवा पा रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी दुकान में अधिकांश ग्राहक देहात से आते हैं।
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वह इस मशीन के बारे में जानते ही नहीं। दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनका कारोबार नगद पर ही टिका है। कुछ चुनिंदा ग्राहक ही हैं जो इस पर विश्वास करते हैं और स्वैप मशीन अथवा पेटीएम के जरिए सामान की खरीदारी करने में यकीन रखते हैं। मंझनपुर में सोलर ऊर्जा का उपकरण बेचने वाले मंजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने मशीन के लिए बैंक में आवेदन कर दिया है, लेकिन कितने लोग इस मशीन का इस्तेमाल करेंगे। इसको लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। बताया कि देहात इलाके से उनके पास ग्राहक आते हैं। सबसे ज्यादा उपकरण देहात ही जाते हैं, ऐसे में किसान कितना इसका इस्तेमाल करेगा।

हजारों दुकानों का नहीं है रजिस्ट्रेशन
 जिले  में एक हजार से ज्यादा ऐसी दुकानें हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। यह दुकानदार नगद लेनदेन ही करते हैं। यही कारण है कि इनका कोई हिसाब नहीं होता है।
  सेल्स टैक्स विभाग की अनदेखी के कारण अधिकांश दुकानों का रजिस्ट्रेशन अब तक नहीं हो सका। इनमें कई बड़े दुकानदार भी शामिल हैं, जिनका प्रतिदिन लाखों रुपये में कारोबार होता था। नोटबंदी के बाद से कारोबार मंदा पड़ा तो दुकानदार बेचैन हो गए। नगदी लेनदेन करने वाले इन दुकानदारों ने अपना रजिस्ट्रेशन जानबूझकर नहीं कराया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इनको हिसाब नहीं रखना पड़ता है।

मशीन लगाकर लिमिट ताकते रहते हैं कारोबारी
जिले के कारोबारियों ने स्वैप मशीन दुकान में लगवाना शुरू कर दिया है। यह वह दुकानदार हैं, जिन्होंने बैंक से सीसी (क्रेडिट कार्ड) बनवा रखा है। जितनी लागत का सीसी बना है, उतना ही यह कारोबार करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यदि कारोबार इनकी लिमिट से ज्यादा हो जाएगा तो इनको टैक्स देना पड़ेगा। यही कारण है कि ऐसे दुकानदार मशीन लगवाने  के बाद अपने कारोबार की लिमिट पर निगाह गड़ाए रहते हैं। लिमिट से कम का ही वह बिजनेस स्वैप मशीन से कराने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वह बाकायदा पूरी सावधानी भी बरतते हैं।

बैंकों की नहीं सुधर रही हालत
मंझनपुर (ब्यूरो)। जिले में अभी भी नगदी का संकट बना हुआ है। देहात इलाकों के बैंकों की हालत में अभी भी सुधार नहीं हुआ है। ग्राहकों को दो से पांच हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इससे गंगा व यमुना की तराई इलाके के लोग परेशान हैं। वह पर्याप्त रकम न मिलने से हलाकान हैं। एटीएम भी उनकी मदद नहीं कर पा रहे हैं। देहात इलाके के अधिकांश एटीएम ठप चल रहे हैं।
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