महिलाओं को समूह से जुड़कर नई पहचान मिली है। समूह से आमदनी हुई तो आत्मनिर्भर बनकर इन महिलाओं ने परिवार की समस्याओं को दूर करने में मदद की है। समूह की महिलाओं की मानें तो आत्मनिर्भर बनने से उनका सामाजिक दायरा बढ़ा है।
कड़ा क्षेत्र के श्रीगणेश महिला स्वयं सहायता समूह की कोषाध्यक्ष रंजना साहू बताती हैं कि जबसे समूह से जुड़े हैं, निर्भीकता आई है। इसके बाद आटा, बेसन व सरसों के तेल का कारखाना शुरू कर दिया। इससे महीने में 12-14 हजार की आय होती है।
समूह की अध्यक्ष अनीता देवी मोमोज का ठेला लगाती हैं। इसी तरह सुमित्रा ने समूह की मदद से किराने की दुकान और गीता ने पशुपालन के लिए भैंस खरीदी है। पूनम देवी ने लस्सी की दुकान शुरू की है। सभी महिलाएं सात से आठ हजार कमा रही हैं।
बढ़ा सामाजिक दायरा
स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके जीवन में स्वयं सहायता समूह ने अमूलचूल परिवर्तन किया है। आज उनकी एक पहचान है, इससे उनका सामाजिक दायरा बढ़ा है।
बेचने के लिए खोज रहीं सेल्समैन
- समूह की कोषाध्यक्ष रंजना ने बताया कि उनकी आय मात्र घर से ही होती है। आजकल बाजार में उनका बेसन नहीं पहुंच पाता और न ही आटा और तेल बेचने की दूसरी कोई व्यवस्था है। इसके लिए एक सेल्समैन की तलाश की जा रही है।
- समूह का उद्देश्य महिलाओं की क्षमता में वृद्धि करना है। कड़ा की महिलाओं के समूह को इसका एक अच्छा उदाहरण माना जा सकता है। सभी महिलाएं मिलकर अलग-अलग काम कर ही रही हैं, यह एक अच्छी पहल है। - दिव्यांशु सिंह, जिला मिशन प्रबंधक