वैसे तो हर मौसम में खादी कपड़ों की मांग रहती है लेकिन सर्दी आते ही खादी के कपड़ों की मांग बढ़ गई है। खास बात यह है कि खादी में भी कपड़ों की वैरायटी तो हैं। साथ ही जनवरी माह तक 30 फीसद तक छूट भी मिल रही है।
जिला मुख्यालय में खादी की सदरी, कंबल, रजाई और मफलर आदि की बिक्री खूब हो रही है। सर्दी को देखते हुए दुकानदारों ने माल का स्टाॅक कर लिया है। भैला मकदूमपुर के 70 वर्षीय श्याम प्रकाश मिश्र ने बताया कि वह शुरू से ही खादी का कपड़ा पहनते हैं। उन्हें खादी का कपड़ा काफी पसंद है।
करारी के रामा वर्मा ने बताया कि खादी का कपड़ा हर मौसम में अच्छा होता है। खादी के कपड़े पहनने का आज भी चलन है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले आज भी स्वेटर की बजाय सदरी पहनते हैं। कई लोग तो खादी का कुर्ता-पैजामा व शर्ट भी बनवाते हैं।
कटिया सर्दी में गर्म, गर्मी में रहता ठंडा
दुकानदार राज नारायण सिंह ने बताया कि मंझनपुर में उनकी दुकान करीब 20 साल से है। खादी के कपड़े कई तरह के आते हैं। कटिया नाम का कपड़ा सर्दी में गर्म रहता है। जबकि गर्मी के समय ठंडा रहता है। यह 1500 रुपये मीटर बिकता है। इसी तरह से मटका नाम के कपड़े की भी खूब बिक्री होती है। यह 1200 मीटर मिलता है।
दुकानदार हरि नारायण सिंह ने बताया कि सभी सीजन में खादी के कपड़ों की मांग रहती है। दुकान पर सूती खादी, पॉली खादी, गमछा, रुमाल, चादर, सदरी, कोट-पैंट, कुर्ता-पायजमा के कपड़ा और रेडीमेट भी उपलब्ध हैं। सर्दी में सदरी और कोट-पैंट की अधिक मांग होती है। उन्होंने बताया कि दुकान में खादी के कपड़ों में 110 रुपये से लेकर 1,200 रुपये प्रतिमीटर तक उपलब्ध हैं।
खादी के कपड़े आरामदायक और त्वचा के अनुकूल होते हैं। साथ ही सर्दी में गर्मी और गर्मियों में ठंडक प्रदान करते हैं। इस मांग के कारण खादी ग्रामोद्योगों ने सर्दी के लिए विशेष कलेक्शन जैसे स्वेटर, शॉल, जैकेट और सदरियां पेश की हैं। खादी को पर्यावरण-अनुकूल होने के कारण पसंद भी किया जा रहा है। - हरि नारायण सिंह, दुकानदार