मंझनपुर। प्रेमजाल में फंसा कानपुर की ईशा से शादी कर कथित रूप से उसे मौत के घाट उतारने वाले दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह का अब तक पुलिस सुराग नहीं लगा सकी है। विवाहिता के काटकर गायब किए गए सिर का भी अब तक कहीं पता नहीं चल सका है। शव से गायब सिर और आरोपी दरोगा की तलाश में कौशाम्बी की दो पुलिस टीमें कानपुर और चित्रकूट में रात भर दबिश देती रहीं। एसपी रतनकांत पांडेय ने बताया कि कटे सिर की बरामदगी से घटनास्थल का पता चलेगा। इसके बाद घटना की तफ्तीश आगे बढ़ाई जाएगी। महेवाघाट थाने में दर्ज अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट में भी पुलिस ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की है।
बता दें कि मंगलवार को महेवाघाट यमुना पुल पर कानपुर की रहने वाली ईशा सिंह (30) की सिरकटी लाश मिली थी। ईशा सिंह प्रतापगढ़ में तैनात और चित्रकूट के छिवलहा गांव के रहने वाले दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह की दूसरी पत्नी थी। उसे प्रेमजाल में फंसाकर ज्ञानेंद्र सिंह ने पहली पत्नी के जिंदा रहते हुए शादी कर ली थी। मगर ज्ञानेंद्र सिंह के पहले से शादीशुदा होने की भनक लगते ही साल भर पहले दोनों में मनमुटाव हो गया। ईशा सिंह तभी से मायके में रहने लगी थी। ईशा की मां विनीता ने बताया कि 18 मई को ज्ञानेंद्र घर आया था। बहाने से वह ईशा को अपने साथ ले गया था। उनकी कार भी लेता गया था। लापता ईशा की 19 मई की सुबह महेवाघाट यमुना पुल पर लाश मिली थी। शव का सिर धड़ से गायब था। उसकी तलाश में 5 दिनों से पुलिस परेशान है। शुक्रवार को शव की शिनाख्त होने और ईशा के परिजनों द्वारा दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह पर ही हत्या का आरोप लगाए जाने के बाद से पुलिस उसकी भी तलाश में जुटी है। एसपी ने बताया कि एसओजी के साथ महेवाघाट एसओ के नेतृत्व में पुलिस की दो टीमें विवाहिता के गायब सिर और फरार दरोगा की तलाश में लगाई गई हैं। रात भर टीमों ने कानपुर, चित्रकूट और कौशाम्बी में दबिश दी। मगर फरार दरोगा और विवाहिता के कटे सिर का सुराग नहीं लग सका है। एसपी के मुताबिक घटनास्थल का सही पता चलने के बाद तफ्तीश आगे बढ़ाई जाएगी।
पेशेवर अंदाज में दिया है घटना को अंजाम
मंझनपुर (ब्यूरो)। कानपुर की ईशा हत्याकांड के आरोपी दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह की तलाश में जुटी पुलिस उसके शातिराना और पेशेवर अंदाज से परेशान है। ईशा के काटकर गायब किए गए सिर और फरार दरोगा की खोजबीन में लगे एसओजी प्रभारी विपिन त्रिवेदी ने बताया कि दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह 18 मई को अपनी दूसरी पत्नी ईशा को लेकर निकला था। 18 मई को अपराह्न 3 बजे तक उसके मोबाइल की लोकेशन कानपुर-आगरा मार्ग पर मिली है। मगर तीन बजे से उसका मोबाइल स्विचआफ है।
ईशा की मां की जिस कार से वह निकला था वह कार भी सरोजनी नगर के समीप पुलिस को मिल गई है जबकि खून से सना एक कपड़ा चित्रकूट के समीप एक अस्पताल के पीछे फेंका मिला है। इससे साफ है कि हत्यारों ने बड़े ही शातिराना और पेशेवर अंदाज में इस पूरी घटना को अंजाम दिया है। पुलिस को भटकाने की नीयत से मोबाइल की लोकेशन, कार और कपड़े को अलग-अलग स्थानों पर जान बूझकर छोड़ा गया है।