किसानों की उपज की खरीद और उनके भुगतान के लिए शासन-प्रशासन की ओर से तमाम दावे किए जा रहे हैं । मगर जिम्मेदारों की लापरवाही से अब तक लक्ष्य का सिर्फ 64 फीसदी ही गेहूं खरीदा जा सका है। इनमें भी तमाम किसानों को अभी तक बेची गई उपज का भुगतान भी नहीं हुआ है।
जबकि 15 जून तक लक्ष्य 46 हजार मिट्रिक टन (एमटी) गेहूं खरीद कर उसका भुगतान किसानों को कर दिया जाना है। ऐसे में बाकी बचे छह दिन के भीतर लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रशासन 16 हजार एमटी गेहूं कहां से लाएगा। यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इस साल गेेहूं खरीद के लिए जिले में दस एजेंसियों के कुल 61 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से शासन ने 46 हजार एमटी गेहूं किसानों से खरीद करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन अभी तक जिला प्रशासन 29928 एमटी ही गेहूं की खरीद कर सका है। जबकि शासन ने 15 जून तक गेहूं खरीद प्रक्रिया को बंद करने का निर्देश जारी किया है।
ऐसे में बाकी बचे छह दिन दिनों में 16 हजार एमटी गेहूं खरीदना जिला प्रशासन के लिए चुनौती है। शनिवार तक खाद्य विभाग ने नौ केंद्रों पर निर्धारित लक्ष्य 13900 एमटी के सापेक्ष मात्र 11230 एमटी गेहूं की खरीद कर सका है। इसी प्रकार पीसीएफ ने 17 केंद्रों पर नौ हजार के सापेक्ष 6307, यूपी एग्रो ने तीन केंद्रों पर 5000 के सापेक्ष 2926 एमटी, कर्मचारी कल्याण निगम ने छह केंद्रों पर 5500 के सापेक्ष 3424 एमटी, यूपी एसएस छह केंद्रों पर 15 सौ के सापेक्ष 698, नेफेड तीन केंद्र पर तीन हजार के सापेक्ष 539, मल्टी सोसायटी 12 केंद्रों पर 49 सौ के सापेक्ष 2792, भारतीय खाद्य निगम दो केंद्र पर एक हजार के सापेक्ष 715 एमटी गेहूं की खरीद किया है।
क्रय केंद्र एजेंसियों की लापरवाही से किसानों से अपेक्षित गेहूं की खरीद नहीं हो सकी है। वहीं तकरीबन 20 फीसदी ऐसे किसान हैं जो गेहूं बेचेन के बाद अब भुगतान के लिए भागदौड़ कर रहे हैं।
इस साल 46 हजार एमटी गेहूं खरीद का लक्ष्य है। लेकिन ऐजेंसियों की धीमी गति से खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसके लिए एजेंसियों को हर हाल में निर्धारित लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। लक्ष्य पूरा नहीं होगा तो कार्रवाई की जाएगी। अभी तक जिले भर में करीब 30 हजार एमटी गेहूं की खरीद हुई है।
अंशुमाली शंकर-डिप्टी आरएमओ