मंझनपुर। मौसम का मार से कौशाम्बी के लाखों किसान कराह रहे हैं। मार्च में तेज हवाओं संग आसमान से बरसी आफत से बची-खुची फसलें सोमवार की रात हुई मूसलाधार बारिश में पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। खुद के जिले के अफसरों का दावा है कि प्राकृतिक आपदा में करीब 1.50 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। बेमौसम की बारिश से जिले में रबी की करीब 71 करोड़ रुपये की फसलों की बर्बादी हुई है। पर, अब तक किसानों को मदद के नाम पर एक फूटी कौड़ी नहीं मिली है।
कौशाम्बी में किसानों पर बार-बार मौसम का कहर टूट रहा है। पर, जैसी आफत इस साल आसमान से गिरी है। फसलों की ऐसी बर्बादी कौशाम्बी के एक भी बुजुर्ग किसान को याद नहीं है। मार्च महीने में तेज हवाओं के साथ हुई बरसात में गिरकर गेहूं की फसल बर्बाद हुई थी। बची-खुची फसल सोमवार और मंगलवार की रात हुई मूसलाधार बारिश में तबाह हो गई। इस बर्बादी से जिलेभर के अन्नदाता कराह रहे हैं। एडीएम रामसूरत पांडेय ने बताया कि मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों का गाटावार सर्वे कराया गया है।
एडीएम के मुताबिक जिले के करीब 1.50 लाख किसान प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुए हैं। कुल करीब 71 करोड़ रुपये की फसल मौसम की भेंट चढ़ी है। एडीएम ने दावा किया कि बर्बादी की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई है। प्रयास है कि जल्द से जल्द किसानों को मुआवजा दिया जा सके। उधर, मौसम की मार से बर्बाद किसान सर्वे को लेकर परेशान है। आरोप है कि अफसर और राजस्वकर्मी बर्बादी का आंकलन करने खेत में आए ही नहीं है। ऐसे में घर और दफ्तरों में बैठकर मनमानी तरीके से सर्वे करके रिपोर्ट बना ली गई है। बता दें कि जिले में कुल 66 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई थी। इनमें से करीब 90 फीसदी फसल मौसम की मार में प्रभावित हुई है।