जिले भर में किसानों का गेहूं खरीदने के लिए खोले गए क्रय केंद्रों पर खिलवाड़ शुरू हो गया है। शासन के बार-बार निर्देश के बाद भी किसानों का गेहूं तौलाया नहीं जा रहा। विभागीय आंकड़ों पर जाएं तो डेढ़ माह में लक्ष्य के सापेक्ष महज 28 फीसदी गेहूं खरीदा जा सका है। केंद्रों पर किसानों को गेहूं बेचने के लिए टोकन तो दिया जा रहा है तौल नहीं कराई जा रही। मजबूर होकर किसान अपना गेहूं बिचौलियों को बेच रहा है। ऐसे में उसे शासन से समर्थित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
योगी सरकार के सत्ता में आते ही आमजन ने राहत की सांस ली थी। माना जा रहा था कि शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्रों को मिलेगा। मगर यह मुख्यमंत्री की घोषण तक ही सीमित दिख रहा है। कर्मचारियों की कमीशनखोरी की आदत नहीं छूट रही है। गेहूं की अच्छी पैदावार को देखते हुए शासन ने जिले का लक्ष्य 25 हजार मीट्रिक टन से बढ़ाकर 62 हजार मीट्रिक टन निर्धारित कर दिया है। शासन की मंशा है कि गेहूं बेचने वाले किसानों को शासन द्वारा निर्धारित मूल्य 1635 रुपए हर हाल में मिले। शुरुआती सख्ती के बाद शासन का रुख भांपते हुए क्रय केंद्रों पर मनमानी शुरू हो गई है। किसान अपना गेहूं बेंचने के लिए क्रय केंद्र पर जाता है तो उसके हाथ सिर्फ टोकन लगता है। निर्धारित तिथि पर जब वह गेहूं लेकर पहुंचता है तो उसे लौटा दिया जाता है। मामले की शिकायत पिछले दिनों जिले में आए प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी से सिराथू विधायक शीतला प्रसाद ने किया था।
आरोप लगाया कि अझुवा मंडी के क्रय केंद्र प्रभारी का रवैया ठीक नहीं है। इसके बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। यही हाल विकास खंड कौशांबी के जाठी व विजिया चौराहा क्रय केंद्र का है। उरई गांव के किसान मनोज केसरवानी, मनदीप अवस्थी, कोमल यादव गेहूं बेचने के लिए कई दिन से चक्कर काट रहे है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। केंद्र के कर्मचारी 50 रुपये कुंतल कमीशन की मांग की जा रही है। विपणन कार्यालय विजिया में खुले क्रय केंद्र का में किसान गंगा प्रसाद शुक्ल गेहूं बेचने पहुंचे तो 11 मई को गेहूं खरीद का टोकन उन्हें दिया गया है। कमीशन नहीं देने देने पर उनका गेहूं आज तक नहीं तौलाया गया। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद किससे की जा रही है। क्रय केंद्र प्रभारियों की मनमानी से किसानों का हाल बेहाल है।