किसानों के लिए रविवार और सोमवार को आसमान से बारिश नहीं तबाही बरसी है। तेज पछुआ हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश खेल-खलिहान, सड़कें, गलियां लबालब हो गई। वहीं तेज हवा के झोंकाें से खेत में खड़ी गेहूं, सरसों और चने की फसलें भी गिरकर बर्बाद हो गई। वहीं आलू के खेतों में पानी भर गया है। इससे आलू के भी सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। खुद किसानों का अनुमान है कि गिरने से सरसों, चना की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। वहीं गेंहू की फसलों में भी 50-60 प्रतिशत तक नुकसान होना पक्का है।
कौशाम्बी के किसानों के लिए दो साल से मौसम तबाह करने वाला रहा है। पिछले साल भी रबी की सीजन में जब आलू, सरसों, चना, मटर, मसूर आदि की फसलें तैयार हुई थी। तभी 24 फरवरी 2014 को भीषण बारिश और ओलावृष्टि हुई थी। इससे किसानों की सारी उपज का सत्यानाश हो गया था। इस साल भी रबी के सीजन में फसलों की बुआई के समय से ही बेमौसम बारिश का कहर चल रहा है। इधर, अब जब सरसों, चना, मटर, अरहर की फसल तैयार हो रही थी। तब फिर मौसम का कहर किसानों पर टूटा। शनिवार की रात से रूक-रूककर हो रही बरसात ने ही किसानों के आंसू निकाल दिए थे। वहीं सोमवार को तो तेज हवाओं के साथ आसमान से किसानों की लिए आफत बरसी।
करीब घंटेभर तक मूसलाधार बरसात हुई। वहीं तेज हवा के झोंकों से गेंहू समेत सभी फसलें गिर गई। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डा अजय कुमार ने बताया कि इस बारिश ने चना-मटर और सरसों की खेती को करीब 40-45 प्रतिशत नुकसान संभव है। वहीं फूलदशा में रही 10 फीसदी अरहर की फसलों को भी नुकसान होने की संभावना है। बताया कि फूल और फली दशा में रही फसलें हवा के साथ हुई बारिश से गिर गई हैं। इससे दाने कमजोर होंगे और पैदावार में भी कमी आएगी। किसानों का मानना है कि अब उनके खेतों में कुछ नहीं बचा है। गिरने और पानी में डूबने से चना, मटर, आलू, सरसों, समेत अन्य सभी फसलों का तो पूरी तरह से सत्यानाश हो चुका है। वहीं गिरने से गेंहू की भी फसलों का 50-60 प्रतिशत नुकसान होना पक्का है।