मंझनपुर । किसानों पर मौसम का कहर जारी है। दो दिन से साथ रुक-रुककर हो रही बारिश ने सोमवार को रौद्ररूप अख्तियार कर लिया। तेज पछुआ हवाओं के साथ घंटेभर मूसलाधार बरसात हुई। इससे जहां खेत-खलिहान, सड़कें, गलियां लबालब हो गईं, वहीं तेज हवा के झोंकों से खेत में खड़ी अरहर, गेहूं, सरसों और चने की फसल गिरकर बर्बाद हो गई। खुद कृषि विशेषज्ञ बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से फसल गिरने से 20-25 फीसदी नुकसान का अनुमान जता रहे हैं। जबकि किसानों की मानें तो बरसात ने उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया है। इससे खेती 50-60 प्रतिशत तक की बर्बादी होना पक्का है।
कौशाम्बी के किसानों के लिए अबकी मौसम तबाह करने वाला रहा है। रबी की सीजन के बुआई के समय से ही बेमौसम बारिश का कहर चल रहा है। इधर, अब जब सरसों, चना, मटर, अरहर की फसल तैयार होने वाली थी, तब फिर मौसम का कहर किसानों पर टूटा। शनिवार की रात से रुक-रुककर हो रही बरसात ने ही किसानों के आंसू निकाल दिए थे। वहीं सोमवार को तो तेज हवाओं के साथ आसमान से किसानों की लिए आफत ही बरसी शाम करीब घंटेभर तक ऐसी मूसलाधार बरसात हुई। जिससे खेत-खलिहान, गली, सड़कें जलमग्न हो गई।
वहीं खेत में तैयार आलू, मटर, मसूर, चना की फसलें भी डूब गई हैं। वहीं हवाओं के तेज झोंकों से गेहूं और अरहर की फसल भी गिर गई हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार ने बताया कि इस बारिश ने चना-मटर और सरसों की खेती को करीब 20-25 प्रतिशत नुकसान संभव है।
वहीं फूलदशा में रही 10 फीसदी अरहर की फसलों को भी नुकसान होने की संभावना है। बताया कि फूल और फली दशा में रही फसलें हवा के साथ हुई बारिश से गिर गई हैं। इससे दाने कमजोर होंगे और पैदावार में भी कमी आएगी। किसानों का मानना है कि अब उनके खेतों में कुछ नहीं बचा है। गिरने और पानी में डूबने से चना, मटर, आलू, सरसों, समेत अन्य सभी फसलों का तो पूरी तरह से सत्यानाश हो चुका है। वहीं गिरने से अरहर और गेंहू की भी फसलों का 50-60 प्रतिशत नुकसान होना पक्का है।