सैनी गांव में बनी पानी टंकी के पंप की मोटर चार दिन पहले फुंक गई थी। मोटर फुंकने से गांव व उसके दो मजरों में बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मच गया है। तीसरे दिन बनकर आई पंप की मोटर पानी नहीं दे सकी। ग्रामीणों को प्यास से तड़पते देख सिराथू विधायक ने भीषण गर्मी में राहत पहुंचाने की कोशिश की लेकिन उनके द्वारा भिजवाया गया पानी इतनी बड़ी आबादी के लिए नाकाफी साबित हुआ।
जीटी रोड किनारे बसे सैनी ग्राम सभा व उसके सुभाषनगर, विजयीपुर मजरों की आबादी लगभग सात हजार है। इन ग्रामीणों को पानी टंकी से पाइप लाइन के जरिए पेयजल उपलब्ध होता है। पंप की मोटर बृहस्पतिवार को अचानक फुंक गई। इसके बाद गांव व मजरों में बूंद-बूंद पानी का संकट खड़ा हो गया। भीषण गर्मी में पेयजल संकट को देखते हुए जेई जल निगम ने आनन-फानन में मोटर की मरम्मत कराई। शनिवार शाम मोटर लगते देख ग्रामीणों को राहत हुई कि अब देर शाम उन्हें पानी मिल जाएगा। मगर मोटर पंप से बूंद भर भी पानी नहीं निकाल सकी। इससे ग्रामीणों का गुस्सा जलनिगम के प्रति पनपने लगा। बूंद-बूंद पानी का संकट देख विधायक सिराथू शीतला प्रसाद उर्फ पप्पू पटेल ने रविवार को दोपहर बाद दो टैंकर पानी गांव में भेजवाया। मगर सात हजार की आबादी के बीच दो टैंकर पानी नाकाफी साबित हुआ। सुभाषनगर व विजईपुर मजरों में तो एक टैंकर पानी नहीं पहुंचा सका। इसके चलते ग्रामीण हैंडपंपों के खारे पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
70 में 30 हैंडपंप नहीं उगल रहे पानी
सैनी व उसके मजरों की सात हजार आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दूसरा संसाधन हैंडपंप है। गांव व उसके मजरों में कुल 70 हैंडपंप लगे हुए हैं। इन हैंडपंपों में 20 का बोर बर्स्ट है तो दस से 12 यांत्रिक खराबी के चलते ठप पड़े हैं। ग्रामीणों ने हैंडपंप मरम्मत की शिकायत ग्राम प्रधान संतोष पटेल से किया पर वह बजट का रोना रो रहे हैं। भीषण गर्मी में पेयजल टंकी से आपूर्ति ठप होने से ग्रामीणों को खारे पानी के लिए दूसरे मोहल्लों में जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों की इस समस्या के प्रति विभागीय जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
पंप की मोटर जलने के बाद ठीक दूसरे दिन बनवाया गया। तीसरे दिन शाम तक उसे लोअर कराया गया पर वह पानी नहीं उगल सकी। आज उसे खुलवाया जा रहा है। सोमवार शाम तक हर हाल में पेयजल समस्या से निजात दिला दी जाएगी।
कौशिक, जेई जलनिगम