गंगा-यमुना दो बड़ी नदियों के बीच बसे दोआबा में गर्मी आते ही गांव-गांव पानी के लिए हाहाकार मच गया है। मंझनपुर तहसील के ही यमुना तराई के गांव गढ़वा, उरई अशरफपुर, बबुरा, समदा, छोकरियन का पुरा आदि दर्जनों गांवों में 70 फीसदी हैंडपंपों का पानी सूख गया है। इससे गांववालों को बाल्टीभर पानी के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। लोग घर से दूर दूसरी बस्ती में लगे सबमर्सिबल पंप, खेतों में लगे नलकूप से पानी भरकर ढोने को मजबूर हैं। यमुना तराई के कई गांव तो नदी के पानी से अपना काम चला रहे हैं।
कौशाम्बी दो नदियों गंगा-यमुना के बीच बसे होने के कारण दोआबा नाम से विख्यात है। फिर भी कौशाम्बी में गर्मी आते ही पानी के लिए हाहाकार शुरू हो जाता है। इस साल तो मानसून के सीजन में औसत से आधी बारिश होने के कारण पानी की समस्या गांव-गांव मार्च महीने से ही शुरू हो गई। मंझनपुर तहसील के 50 से अधिक गांव में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या यमुना तराई के गांव गढ़वा, उरई अशरफपुर, हसनपुर, चांदिकन, हिसामबाद, छोटा गढ़वा, गोपसहसा, गुरौली, बेरौंचा, तारा का पुरवा, सोनवारा आदि गांवो में है। यहां के वासिंदों को पेयजल जुटाने के लिए दूर तक जाना पड़ता है। पानी की किल्लत से मंझनपुर ब्लॉक के समदा, छोकरियन का पुरा, बबुरा, फरीदनपुर, मुकीमपुर, सैदअलीपुर, मोअज्जमपुर, रहीमपुर मौलानी, सैबसा, पंडीरी और सरसवां ब्लॉक क्षेत्र के यमुना कछारी गांव डेढ़ावल, कटरी, केवटरहा, पभोषा, निगहा, ढेरहा, मवई, नौबस्ता, शाहपुर, भवंसुरी, हटवा गांव जूझ रहे हैं। इन गांवों में लगे 60 फीसदी से अधिक हैंडपम्पों ने पानी देना बंद कर दिया है। ऐसे में तराई के कुछ गांव के लोगों को तो मजबूरन यमुना का प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है। वहीं कई अन्य गांव के लोगों को गांव के बाहर लगे सबमर्सिबल पंपों से पानी भरकर ढोना पड़ता है। सबसे बड़ी बात है कि पेयजल की किल्लत की जानकारी अफसरों को भी है। लोगों ने खुद ही खराब पड़े हैंडपंपों को रिबोर कराने की मांग कई बार डीएम, सीडीओ और बीडीओ से की। पर, अफसर इस ओर तनिक भी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
पानी के लिए देखनी पड़ती है बिजली की राह
मंझनपुर तहसील के 50 से ज्यादा गांवों में गर्मी के कारण हैंडपंपों के खराब होने से दिनोंदिन पानी की स्थिति भयावह होती जा रही है। हैंडपंपों के ठप होने से ग्रामीणों को पेयजल के लिए गांव के बाहर लगे सबमर्सिबल तक जाना पड़ता है। यहां भी ग्रामीणों को पानी तभी मिल पाता है, जब देर सबेर बिजली की आपूर्ति होती है। कौशाम्बी ब्लॉक के उरई पहरिया गांव के लोगों ने बताया कि गांव में 35 हैंडपंप खराब हो चुके हैं। मोहल्ले के हरि नारायण द्विवेदी के घर में सबमर्सिबल पंप लगा है। उन्होंने इसकी एक टोंटी गांववालों के लिए घर के बाहर लगा दी है। बिजली आने पर पूरा गांव यहीं से पानी भरकर ले जाता है।
तालाब भी सूखे, पशु-पक्षी बेहाल
दोआबा में सूखे की वजह से तालाबों में भी बूंदभर पानी नहीं है। इससे भीषण तपिश और गर्मी से व्याकुल जंगली जीव जंतुओं और पक्षियों को भी प्यास बुझाने के लिए भटकना पड़ रहा है। बता दें कि दोआबा में गुजरे मानसून सत्र में सिर्फ 33 फीसदी बारिश हुई थी। इसके कारण जहां भूजल स्तर नीचे भाग गया है। वहीं तालाबों में पानी समय से पहले ही सूख गए। तालाबों के सूखने और अप्रैल महीने में ही रिकार्डतोड़ गर्मी से जंगली जीव-जंतु भी पानी के लिए बेहाल होने लगे हैं। पानी की तलाश में जंगली जीव लोमड़ी, सियार, खरगोश आदि दिन ढलते ही आबादी की ओर पानी आने लगे हैं। प्यास से व्याकुल इन जानवारों को अपनी जान की भी परवाह नहीं है। वहीं शासन, प्रशासन ने अब तक तालाबों में पानी भरवाने का कोई इंतजाम नहीं किया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
हैंडपंपों के रीबोर के लिए भारी संख्या में आवेदन आए हैं। आवेदनों को देखते हुए 2500 हैंडपंपों के रीबोर का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। पैसा मिलते ही जिन-जिन गांवों में पेयजल की समस्या गम्भीर है, वहां प्राथमिकता के आधार पर हैंडपंपों को रीबोर कराया जाएगा।
ओपी आर्य, सीडीओ कौशाम्बी