डार्क जोन घोषित हो चुके जिले में पेयजल समस्या दिनाेंदिन विकराल रूप लेती जा रही है। जलस्तर नीचे खिसकने से गांवों में लगे हैंडपंप बीमारी उगलने लगे हैं। रिबोर न होने से ग्रामीणों को कीचड़ व दुर्गंधयुक्त पानी पीना पड़ रहा है। विभाग हैंडपंपों के रीबोर को लेकर हाथ पर हाथ रखे बैठा है।
दोआबा पिछले पांच साल से डार्क जोन का दंश भुगत रहा है। आठ में छह ब्लॉकों को शासन ने डार्क जोन घोषित करने के बाद सरकारी नलकूप की बोरिंग पर रोक लगा रखी है। जिले में भारी संख्या में लगे नलकूपों के चलते पानी का अंधाधुंध दोहन रुकने का नाम नहीं ले रहा। इसके चलते गांवों में लगे इंडिया मार्का हैंडपंपों का पानी सूख जाता है। सबसे अधिक खराब स्थिति गर्मी के दिनों में हो जाती है। मौजूदा समय गांवों में लगे लगभग पांच हजार हैंडपंप ठप हो चुके हैं। चल रहे 20 हजार हैंडपंपों में 20 फीसदी की स्थिति ठीक नहीं है।
इन हैंडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। विकास खंड नेवादा के अमवा निवासी ब्रह्म प्रकाश शुक्ल के दरवाजे पर लगा हैंडपंप दो से तीन बाल्टी पानी देता है। मोहल्ले के लोग मजबूरी में कीचड़युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। कीचड़युक्त पानी पीने से लोगों में बीमारी का खतरा बना है। यही हाल कौशांबी ब्लॉक के म्योहर निवासी गजेंद्र प्रसाद मिश्र के दरवाजे लगे हैंडपंप का है। बारिश के दिनों में चालू होने वाला हैंडपंप से अब कीचड़ ही निकल रहा है।
यह स्थिति जिले भर में लगे लगभग दो हजार हैंडपंपों की है। जिम्मेदार हैं कि जिले में विकराल रूप ले रही पेयजल समस्या को लेकर तनिक भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं। महकमे के जिम्मेदार बजट के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।