सरसंवा ब्लाॅक क्षेत्र में 496.30 लाख रुपये की लागत से तैयार रायपुर पेयजल परियोजना ग्रामीणों की प्यास बुझाने के बजाय महज एक शोपीस बनकर रह गई है। करीब एक माह पहले परियोजना से केवल दो दिन आपूर्ति की गई, लेकिन इसके बाद से ही जलापूर्ति ठप है।
ग्रामीण चंद्रभान सिंह, मनीष कुमार और बालगोविंद का कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नियमित जलापूर्ति की उम्मीद जगी थी। घर-घर नल कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन दो दिन पानी आने के बाद आपूर्ति अचानक बंद कर दी गई। तब से लोग हैंडपंपों और निजी साधनों पर निर्भर हैं। कई स्थानों पर खराब हैंडपंपों के कारण समस्या और गंभीर हो गई है।
करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई परियोजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण पूरी योजना दम तोड़ रही है, जबकि विभाग की ओर से जलापूर्ति बहाल कराने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं दिख रहा।
लगातार बाधित आपूर्ति से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने जिम्मेदारों से तत्काल जलापूर्ति बहाल कराने और परियोजना के संचालन में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार रायपुर पेयजल परियोजना केवल शो पीस बन कर रह गई है। जिम्मेदारों की लापरवाही से ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
पिंटू कुमार, ग्रामीण।
हर घर नल से जल स्वच्छ पेयजल आपूर्ति का सरकारी दावा कागजी साबित हो रहा है। धरातल पर हालत बहुत खराब है।
हेमराज यादव ,ग्रामीण
रायपुर पेयजल परियोजना के अंतर्गत आने वाले गांवों में समस्याओं का समाधान करके एक सप्ताह के भीतर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
रामेश्वर निराला,सहायक अभियंता,जल निगम।
पिंटू कुमार, ग्रामीण
पिंटू कुमार, ग्रामीण