मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आरओ प्लांट के नल सूख गए हैं, टोटियां गायब हैं। सबसे अधिक भीड़ वाली जगह ओपीडी के पास लगी आरओ वाटर मशीन बंद है। तीमारदारों और मरीजों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बुनियादी आवश्यकता है। मंझनपुर निवासी संजय कुमार का कहना है कि अस्पताल में आरओ प्लांट लगे होने के बावजूद लंबे समय से बंद पड़े हैं। मरीजों के साथ आए लोगों को काफी परेशानी होती है। नसूल्लापुर के राजाराम का कहना है कि ओपीडी में सबसे अधिक भीड़ रहती है लेकिन वहां लगा आरओ प्लांट खराब है। बाहर लगे प्लांट की तो टंकी और टोटियां तक गायब हैं। कोई देखने वाला नहीं। टेवां के अलोपी प्रसाद ने बताया कि लाखों रुपये की लागत से लगाए गए आरओ प्लांटों की देखरेख नहीं हो रही है। टोटियों का गायब होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। जो चालू हैं, उनकी साफ-सफाई भी सही से नहीं हो रही है।