मंझनपुर (ब्यूरो)। कौशाम्बी में यूरिया खाद के लिए समितियों में रोजाना हंगामा हो रहा है। जिले में खाद की ऐसी किल्लत है कि इसके लिए लाठी-डंडे तक चलने लगे हैं। वहीं विभागीय अफसर जिले में खाद की उपलब्धता नहीं होने की बात कह रहे हैं। एआर कोआपरेटिव का दावा है कि पूरे प्रदेश में खाद की किल्लत है। जितनी खाद उपलब्ध कराई गई है, उसे किसानों को दिया जा रहा है।
बता दें कि कौशाम्बी में रबी की खेती का रकबा करीब 92 हजार हेक्टेयर है। इसमें अकेले गेहूं की फसल का क्षेत्रफल 66 हजार हेक्टेयर है। कृषि विभाग के मुताबिक इस रकबे में बोई गई फसलों की टाप ड्रेसिंग के लिए जिले में 34 हजार मैट्रिक टन यूरिया की जरूरत है। इधर, एक जनवरी को हुई बूंदाबांदी के बाद किसानों को गेहूं, जौ, सरसों आदि फसलों में छिड़काव के लिए यूरिया खाद की आवाश्यकता है। इसके लिए किसानों ने समितियों में डेरा जमा रखा है। पर, जिले में किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए खोली गई सभी 64 साधन सहकारी समितियों में खाद की किल्लत है। इससे खाद के लिए समितियों में रोजाना किसान हंगामा काट रहे हैं। खाद की खातिर लाठी-डंडे भी चलने लगे हैं। तीन दिन पहले ही खाद के लिए मंझनपुर साधन सहकारी समिति में दिनभर हंगामा हुआ। खाद नहीं मिलने से गुस्साए किसान जबरदस्ती खाद उठा ले गए थे।
इस मामले में किसानों पर लूट की एफआईआर तक दर्ज कराई गई है। वहीं बुधवार को भी खाद के लिए बैंगवा समिति कौशाम्बी में मारपीट की घटना हुई थी। इतना कुछ होने के बाद भी साधन सहकारी समितियों में खाद मुहैया कराने में अफसर नाकाम रहे हैं। मामले में एआर कोआपरेटिव दयानंद प्रसाद ने बताया कि कौशाम्बी ही नहीं पूरे प्रदेश में खाद की कमी बनी हुई है। उनका कहना है कि कौशाम्बी में रबी के सीजन में 34 हजार मैट्रिक टन यूरिया की जरूरत है। पर, अब तक जिले को सिर्फ तीन हजार मैट्रिक टन यूरिया खाद ही मिल पाई है। खाद नहीं मिलने से ही यह समस्या है। दावा किया कि जितनी खाद उपलब्ध है, उसमें से 10-15 टन खाद सभी समितियों को देकर वितरण कराया जा रहा है।
कौशाम्बी में यूरिया खाद की इतनी किल्लत है कि साधन सहकारी समितियों में इसका वितरण पुलिस फोर्स की मौजूदगी में कराना पड़ रहा है। एआर कोआपरेटिव ने बताया कि खाद की कमी के कारण उन्होंने सभी समिति के सचिवों को फोर्स लेकर ही वितरण कराने को कहा है। किसानों का भी उन्होंने आह्वान किया कि वे एक-दो बोरी खाद से ज्यादा न लें, ताकि सभी किसानों को खाद मिल सके।