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Kaushambi News: बसों का इंतजार...17 किलोमीटर के लिए ई-रिक्शा का ही सहारा

Sat, 01 Nov 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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करारी से बैगवां के लिए ई-रिक्शा से जाते मुसाफिर।  संवाद
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स्थानीय कस्बे करारी से बौद्ध तपोस्थली कौशाम्बी के लिए आने-जाने का कोई नियमित साधन नहीं है। इस मार्ग पर न तो रोडवेज बसें चलती हैं और न ही कोई प्राइवेट बस सेवा। करीब 17 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए यात्रियों को केवल ई-रिक्शा का ही सहारा लेना पड़ता है।
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कौशाम्बी में भगवान बुद्ध की तपोस्थली है। यहां प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके बावजूद यहां तक पहुंचने के लिए कोई सीधी बस सेवा न होने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि करारी से प्रयागराज के लिए भी कोई रोडवेज सेवा संचालित नहीं है जिसके चलते लोगों को निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्थानीय निवासी राम कुमार ने बताया कि करारी चौराहे से बैंगवा (करीब 13 किमी) तक ई-रिक्शा से जाने में 30 रुपये किराया देना पड़ता है। वहां से कौशाम्बी चार किलोमीटर तक पहुंचने के लिए दूसरे ई-रिक्शा में बैठना पड़ता है। इसका किराया करीब 10 रुपये है। लोगों का कहना है कि सरकारी बस सेवा शुरू होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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कस्बे के राहुल यादव ने बताया कि भगवान बुद्ध की तपोस्थली के दर्शन के लिए दिनभर हजारों लोग करारी होकर आते-जाते हैं लेकिन यहां से कोई नियमित साधन उपलब्ध नहीं है। लोगों को मजबूरी में ई-रिक्शा से ही सफर करना पड़ता है, जो मनमाना किराया वसूलते हैं।
इसी तरह कोसम इनाम गांव के साजिद अली ने बताया कि एतिहासिक दृष्टि से कौशाम्बी का विशेष महत्व है लेकिन परिवहन व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रतिदिन हजारों बाहरी लोग यहां पहुंचते हैं। साथ ही दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग करारी होते हुए मुख्यालय जाते हैं। साधन न होने से लोगों को निजी वाहन या फिर ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ता है।
- करीब डेढ़ माह पहले करारी से कौशाम्बी के बीच रोडवेज बस संचालन को लेकर सर्वे कराया गया है। रूट निर्धारण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जैसे ही रूट निर्धारित होगा, रोडवेज बसों का नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा।- गंगा शंकर शर्मा, डिपो इंचार्ज
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