कौशाम्बी की तीन विधानसभा सीटों पर राजनीतिक धमाचौकड़ी तेज हो गई है। प्रचार-प्रसार के साथ ही चुनावी संघर्ष अपने चरम पर पहुंच गया है। एक-एक वोट के लिए प्रत्याशियों में खींचतान है। रूठों को भी मनाने की पहल शुरू हो गई है। प्रत्याशियों की दाल नहीं गली तो उन्होंने उनके सगे संबंधियों को उनके सामने खड़ा कर दिया। ऐसे मतदाताओं को मनाने के लिए प्रत्याशी उनके खास रिश्तेदारों को भेज रहे हैं ताकि वह गिले-शिकवे भूलकर उनके पक्ष में मतदान कर सकें। इसके अलावा बिरादरी की भी पंचायतें शुरू हो गई हैं। जिसमें चुनावी रणनीति पर चर्चा होती है।
जिले की सभी विधानसभा सीटों पर चुनावी महासंग्राम शीर्ष पर पहुंच गया है। रात-दिन प्रत्याशी चुनावी क्षेत्र को मथने में जुटे हैं। कोई घर व गांव छूटने न पाए, इसके लिए रात-दिन वह इस गांव से उस गांव घूम रहे हैं। इन सबके बीच प्रत्याशियों को उन मतदाताओं ने टेंशन दे रखी है, जो उनसे नाराज है। कुछ बागियों की वजह से नाराज हैं तो कुछ के अपने निजी कारण हैं। अपनों की नाराजगी को दूर करने के लिए प्रत्याशियों ने उनके रिश्तेदारों को अपना मजबूत हथियार बनाना शुरू कर दिया है। नाराज मतदाताओं के घर उनके करीबी व खास रिश्तेदार को भेजा जा रहा है। बकायदे मोबाइल पर बातचीत कराई जाती है।
प्रत्याशी अपनी गलतियां भी स्वीकार कर लेते हैं और एक मौका मांगकर वोट मांग रहे हैं। चुनाव क्षेत्र में यह सिलसिला एकदम से तेज हो गया है। बसपा, भाजपा, सपा, कांग्रेस समेत सभी दलों ने यह तरीका अपनाया है। रिश्तेदारों को घर से लाने व वापस भेजने के लिए प्रत्याशी गाड़ी भी भेजते हैं। गांवों में बिरादरी की पंचायत भी कराई जा रही है। बिरादरी के पंचायत में उन लोगों को शामिल कराया जाता है, जिनकी अपनी जमात में पैठ है।