विधान सभा सिराथू के एक गांव में मतदान बहिष्कार करने के बाद भी उजाला नहीं हो सका। ग्रामीणों के बहिष्कार के बाद पहुंचे अफसरों और प्रत्याशी रहे विधायक के आश्वासन पर ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लिया था। जीत दर्ज होने के बाद विधायक का लगभग तीन साल का कार्यकाल बीत गया पर ग्रामीण उजाले को तरस रहे हैं।
विधानसभा सिराथू का फाजिलपुर गोपालपुर एक गांव का मजरा था। पिछले साल हुए प्रधान पद के चुनाव के दौरान हुए परिसीमन में इसे ग्राम सभा का दर्जा मिल गया। एक हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव का विद्युतीकरण नहीं हो सका है। गांव में उजाला होने का सपना देख रहे ग्रामीणों ने सिराथू विधान सभा के उपचुनाव के दौरान वोटिंग का बहिष्कार कर दिया। एकजुट हुए ग्रामीणों को देख तहसील और जिला स्तरीय अफसर व प्रत्याशी सिटिंग विधायक सिराथू वाचस्पति मौके पर पहुंचे।
ग्रामीण अफसरों के समझाने पर नहीं माने तो सिटिंग विधायक ने वायदा किया था कि जीत मिलने पर गांव का विद्युतीकरण वह अपनी निधि से कराएंगे। सिटिंग विधायक के आश्वासन पर ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लिया और सपा प्रत्याशी वाचस्पति के सिर ताज भी बंध गया। जीत मिलने के बाद गांव का विद्युतीकरण कराना तो दूर ग्रामीणों से मुलाकात करने तक माननीय नहीं पहुंचे।
महज पांच सौ मीटर से गुजरी है लाइन
फाजिलपुर, गोपालपुर गांव के विद्युतीकरण में बहुत लंबी लाइन नहीं बननी है। ग्राम प्रधान का कहना है कि गांव के बगल से महज पांच सौ मीटर दूरी से 11 हजार की लाइन गुजरी है। ऐसे में कुल दस पोल के सहारे ग्रामसभा में बिजली पहुंचाई जा सकती है। लेकिन उपेक्षा के शिकार गांव में उजाला करने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है। अनदेखी के चलते बिजली की एक झलक गांव में देखने के लिए ग्रामीण आज भी बेताब हैं। गांव के रामसुख, महेश, सीताराम आदि को उम्मीद है कि कभी न कभी उनके घर भी बिजली से जगमग होंगे।