दोआबा में ठंड हवाओं का सितम जारी है। हाड़ कपा देने वाली ठंड से लोगों को निजात मिलती नहीं दिख रही है। नौवें दिन भी कोहरे के साथ कड़ाके की ठंड और हवाओं का कहर जारी रहा। रविवार को धूप न होने और आसमान में छाए बादलों को देख बारिश की संभावना जतायी जा रही है। एक- दो दिन में यदि बारिश हुई तो पारे का लुढ़कना तय है। ऐसे में आने वाले दिनों में ठंड से जिले के लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
कौशाम्बी में सर्दी का सितम 31 दिसंबर से लगातार जारी है। शनिवार की शाम से मौसम के मिजाज में तब्दीली होती दिखी। रविवार की सुबह आसमान में छाए घने बादलों ने सूरज की तपिश को पृथ्वी की गोद में आने से रोके रखा। इससे दिन भर लोग ठंड से कांपते नजर आए। शाम के चार बजते ही शीतलहर का प्रकोप शुरू हो गया। चली तेज ठंडी हवाओं और आसमान में छाए बादलों से पारा और लुढ़क गया। चार बजे से ही कोहरे का असर साफ दिखने लगा। शाम होते-होते कोहरा घना होता देख मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न कस्बों और बाजारों में सन्नाटा पसर गया। ठंड हवाओं के चलते बढ़ी गलन से बचने के लिए लोग घरों पर अलाव और रजाई में लिपटे रहे। नौ दिन से लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड से कांप रहे जिले के गरीब बाशिंदों के लिए अलाव का इंतजाम जिला प्रशासन नहीं करा सका। सबसे बुरा हाल बस, विक्रम व दुपहिया वाहनों से सफर करने वाले लोगों का रहा। लोगों को चौराहों और स्टेशनों पर कहीं भी अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
फिर बढ़ी किसानों के माथे की सिकुड़न
शुक्रवार को निकली कड़ाके की धूप के बाद शनिवार से मौसम का मिजाज बिगड रहा है। आसमान में छाए घने बादलों के चलते धूप नहीं निकल सकी। दूसरे दिन रविवार को स्थिति और भयावह हो गई। आसमान में बादल और घने हो गए तो सर्द हवाओं के थपेड़ों ने भी रफ्तार पकड़ लिया। मौसम का बिगड़ा मिजाज देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। किसानों का मानना है कि यदि तेज बारिश हुई तो अरहर, सरसों व आलू की पछेती खेती में नुकसान होना तय है। मौसम के मिजाज को भांप किसान मन ही मन संभावित नुकसान को लेकर चिंतित हो रहा है।