जिला अस्पताल में गर्भवती महिला की जांच करतीं चिकित्सक। संवाद
मंझनपुर। बदलती जीवनशैली और अव्यवस्थित दिनचर्या का असर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। गर्भवती महिलाओं में विटामिन बी-12 की कमी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में रोजाना बी-12 की कमी से पीड़ित 20 से 30 महिलाएं पहुंच रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बदलते खानपान की आदतें, अव्यवस्थित दिनचर्या और पौष्टिक आहार की कमी इसका प्रमुख कारण है।
जिला महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना गौतम ने बताया कि विटामिन बी-12 गर्भावस्था के दौरान अत्यंत जरूरी तत्व है। इसकी कमी से थकान, चक्कर आना, कमजोरी, हाथ-पैरों में झनझनाहट, एनीमिया और भ्रूण के विकास में बाधा जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई मरीजों में ऐसा भी देखा जा रहा है कि बी-12 की कमी लंबे समय तक रहने पर मानसिक तनाव और याददाश्त से जुड़ी शिकायतें भी उभर रही हैं। उनका कहना है कि गर्भवतियों में बी-12 की कमी अधिकतर उन महिलाओं में मिल रही है, जिनका भोजन मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट आधारित है और जिनकी दिनचर्या अनियमित है।
कई महिलाएं दूध, दही, पनीर, अंडा और हरी सब्जियों का प्रयोग कम करती हैं। जो विटामिन बी-12 के अच्छे प्राकृतिक स्रोत हैं। डॉक्टरों ने कहा कि गर्भवती महिलाएं अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करें, जो विटामिन बी-12 से भरपूर हों। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है। नियमित जांच कराना भी बेहद आवश्यक है ताकि समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।
गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। कुछ महिलायें पोषण ठीक लेती हैं, लेकिन पाचन ठीक नहीं होता है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की कमजोरी, चक्कर या असामान्य थकान के लक्षण दिखाई देने पर तुंरत विशेषज्ञ से संपर्क करें। -डॉ. संजीदा, स्त्री रोग विशेषज्ञ
पंकज
पंकज
पंकज
पंकज
पंकज