माघ मास के चौथे प्रमुख स्नान पर्व वसंत पंचमी के दिन जिले के कड़ा समेत दर्जनभर गंगा घाटों पर भक्तों का सैलाब उमड़ा रहा। भोर से ही गंगा स्नान कर घर पहुंचे भक्तों ने विद्या की देवी मां सरस्वती का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। इस दिन गंगा स्नान व देवी पूजन करने वालों में छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक रही।
मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी कहा जाता है। मान्यता है कि ब्रह्मा के आदेश पर मां सरस्वती स्वर्ग से वसंत पंचमी के दिन ही पृथ्वी लोक पर अवतरित हुईं। तब से लेकर आज तक वसंत पंचमी पर्व ज्ञान के पुजारियों, छात्र-छात्राओं द्वारा मनाया जाता है। माघ मेले में कल्पवास करने वाले इसे चौथे प्रमुख स्नान के रूप में मानते हैं। मान्यताओं पर जाएं तो इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद जो भी भक्त मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा करता है उसके घर में कभी न तो क्लेश रहता है और न ही कोई संकट आता है और देवी लक्ष्मी की भी महती कृपा भक्त के घर बनी रहती है।
बुधवार को बसंत पंचमी पर्व के मौके पर जिले के अलावा प्रतापगढ़, उन्नाव, रायबरेली, सुल्तानपुर, कानपुर, जौनपुर आदि जिलों से भारी संख्या में भक्त शीतलाधाम कड़ा पहुंचे। यहां पर गंगा के कुबरी, कालेश्वर, नागा आश्रम, तपस्वी घाट, बाजार घाट में स्नान करने के बाद भक्तों ने मां शीतला देवी की दरबार में माथा टेकते हुए सरस्वती स्वरूप का दर्शन किया।