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उमेश पाल हत्याकांड : अतीक का बेहद वफादार था नकेश, खाना पकाने से लेकर गोली चलाने में था माहिर

Wed, 22 Mar 2023 10:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

जाफरपुर महावां गांव का नकेश चंद दिनों के भीतर माफिया अतीक का वफादार बन गया था। जेल से जमानत दिलाने के बाद अतीक ने उसे घर में खाना बनाने की नौकरी दी, लेकिन उसकी वफादारी के कारण परिवार का हर सदस्य उसका कायल हो गया।
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Prayagraj News : अतीक के गुर्गों को न्यायालय में पेश किया गया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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जाफरपुर महावां गांव का नकेश चंद दिनों के भीतर माफिया अतीक का वफादार बन गया था। जेल से जमानत दिलाने के बाद अतीक ने उसे घर में खाना बनाने की नौकरी दी, लेकिन उसकी वफादारी के कारण परिवार का हर सदस्य उसका कायल हो गया। गोली चलाने से लेकर जायज व नाजायज कामों में भी नकेश दखल रखता था। मंगलवार को नकेश के जेल जाने के बाद उसके पैतृक गांव के लोग हैरान हैं।

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मंगलवार को प्रयागराज पुलिस ने नकेश को जेल भेज दिया। गांव के लोग उसका नाम सिर्फ नकेश जानते थे। उसकी गिरफ्तारी जब सुर्खियां बनी तो मालूम चला कि माफिया के यहां रहने के दौरान उसे नकेश उर्फ राकेश उर्फ लाला जैसे नाम मिले। नकेश की शादी वर्ष 2002 में बरूवा गांव की बिट्टी देवी के साथ हुई थी।

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शादी के कुछ दिनों बाद बिट्टी देवी की आग से जलकर मौत हो गई। मामले में पुलिस ने नकेश को जेल भेज दिया। नकेश के घरवालों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह जेल में काम नहीं करने के एवज में पैसा देने अथवा जमानत करवा पाने में असमर्थ थे। इस दौरान जेल में बंद माफिया अतीक से नकेश की मुलाकात हुई। नकेश अतीक की सेवा में लग गया। नकेश की सेवा से खुश होकर अतीक ने उसकी जमानत मंजूर करवाई। इसके बाद उसे घरेलू नौकर बना लिया।
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नकेश को मूलरूप से घर में खाना बनाने का काम दिया गया था। जल्द ही वह अतीक के वफादारों में शामिल हो गया। तीन मार्च को एसटीएफ नकेश को उसके गांव से हिरासत में ले गई। मंगलवार को जब प्रयागराज पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी किया तो गांव के अलावा परिवार के लोग भी सन्न रह गए। 

दरअसल पुलिस ने दावा किया कि नकेश ने ही गिरफ्तार किए गए दूसरे आरोपी कैश के साथ मिलकर शूटरों के असलहे व नकदी अतीक के चकिया स्थित कार्यालय के कमरे में छिपाए थे। ग्रामीणों की मानें तो जेल से छूटने के बाद सिर्फ एक बार ही काफिले के साथ नकेश गांव आया और अपने पट्टीदार की विवादित जमीन पर घरवालों को कब्जा दिलाकर चला गया। इसके बाद से वह कभी-कभार ही गांव आता था।
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