इलाके के एक ईंट-भट्ठा परिसर से दो युवकों ने परिजनों संग मजदूरी करने आई मूक-बधिर युवती को रविवार रात अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया। एक तरफ पुलिस पीड़ित परिजनों की शिकायत पर दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। वहीं, दूसरी तरफ घटना की जानकारी से ही इन्कार कर रही है। एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है।
बिहार प्रांत का एक व्यक्ति परिवार के साथ चरवा क्षेत्र स्थित ईंट-भट्ठे पर रहकर मजदूरी करता है। पीड़ित पिता ने बताया कि रोजाना की तरह रविवार रात भी वह खा-पीकर पत्नी-बच्चों के साथ भट्ठे के समीप अपनी झोपड़ी में सो गया था। रात करीब 11 बजे पत्नी ने बताया कि उसकी 18 वर्षीय मूक-बधिर बेटी झोपड़ी में नहीं है। इस पर वह साथी मजदूरों संग बेटी की तलाश करने लगा।
परिजनों के मुताबिक रात करीब 12.30 बजे चायल-मनौरी मार्ग पर मूक-बधिर बेटी कराहते हुए मिली। पिता के पूछने पर बेटी ने बताया कि वह लघुशंका करने के लिए उठी थी। इसी दौरान गांव के ही एक युवक ने अपने एक अन्य साथी के साथ उसे दबोच लिया। दोनों जबरन उसका मुंह दबाकर बगीचे की तरफ घसीट ले गए। आधा किलो मीटर दूर ले जाकर दोनों ने उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया। पीड़ित पिता की सूचना पर आई पुलिस ने मौका मुआयना के बाद आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
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आरोप- मुकदमा दर्ज नहीं कराने का दबाव
पीड़ित पिता की सूचना पर पुलिस रात में ही ईंट भट्ठा पर आई थी। आरोप है कि पुलिस और ईंट भट्ठा मालिक, पीड़िता के परिजनों पर मुकदमा नहीं दर्ज करवाने का दबाव बना रहे हैं। उनको समझाया जा रहा है कि मुकदमा दर्ज होने पर हर माह उन्हें बिहार से अदालत में गवाही के लिए आना पड़ेगा। पीड़ित परिवार को थाने से समझा- बुझाकर लौटा दिया गया। घटना के बाद से बाहर से मजदूरी करने आया परिवार डरा-सहमा है।
दुष्कर्म के बाद आरोपियों ने दिए पांच सौ रुपये
पीड़िता के पिता ने बताया कि सामूहिक दुष्कर्म के बाद आरोपियों ने उसकी बेटी को पांच सौ रुपये देकर भगा दिया। दरिंदों ने किसी से बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी है। इससे पूरा परिवार डरा-सहमा है। उनका कहना है कि वे बेहद गरीब हैं और घटना के बाद से सहमे हैं। बिहार से आकर मुकदमा लड़ने की भी उनकी क्षमता नहीं है।
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आरोपियों को पुलिस ने बताया मददगार
पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी हुई है। सीओ चायल को जांच सौंपी गई है। पता चला है कि मूकबधिर किशोरी की दिमागी हालत भी ठीक नहीं है। वह अक्सर घर छोड़कर निकल जाती है। कई बार उसे घर वाले खोजकर ला चुके हैं। दो युवकों ने उसे घटना वाले दिन देखा तो उसे ले जाकर परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है। सोशल मीडिया पर शिकायती पत्र कैसे पहुंचा और किसने लिखा। इसकी जांच कराई जा रही है। पहले सीओ और थानेदार घटना से अनभिज्ञता जताते रहे, फिर बोले, जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।