मंझनपुर। परिवहन के लिए दो विभागों ने अलग-अलग नियम बना रखा है। एक वाहन को रवन्ना देकर परिवहन की वैधता निर्धारित कर रहा है तो दूसरा विभाग उसे ओवरलोड बताकर चालान कर दे रहा है। एक ही तरह के परिवहन में दो विभागों के नियमों के चक्कर में ट्रांसपोर्ट पिस रहे हैं। दोआबा में बालू परिवहन करने वाले वाहनों के ट्रांसपोर्टरों का बुरा हाल है। वह घाटों से खनन विभाग के नियमानुसार बालू लादकर रवन्ने के साथ सड़कों पर निकलते हैं। जितनी बालू उतने का रवन्ना लेकर परिवहन करने पर खनन विभाग इन वाहनों पर कार्रवाई नहीं करता। दूसरी ओर परिवहन विभाग के निशाने पर ऐसे वाहन देखते ही आ जाते हैं। निर्धारित क्षमता से अधिक लोड होने पर परिवहन विभाग के अधिकारी वाहनों को पकड़कर उनकी तौल कराते हैं।
चालक ने भले ही भार की रायल्टी जमा कर रखी हो पर परिवहन विभाग के चंगुल से नहीं बच सकता। परिवहन विभाग के अधिकारी उसका चालान कर जुर्माना वसूलते हैं। बानगी के तौर दस चक्का वाहन को लिया जा सकता है। इस वाहन को परिवहन के लिए खनन विभाग दस घन मीटर (20 टन) का रवन्ना जारी करता है। बालू घाटों से जब यह वाहन दस घनमीटर बालू लेकर सड़क पर पहुंचता है तो परिवहन विभाग के अधिकारी इसे ओवरलोड में बंद कर देते हैं। इसके पीछे कारण यह है कि परिवहन विभाग में दस चक्का वाहन के परिवहन की क्षमता 15 टन ही निर्धारित की गई है। ऐसे में दो विभागों के अलग-अलग नियम से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं।