नगर पालिका परिषद क्षेत्र के नागरिकों और व्यापारियों को आज भी परिवहन सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन मौजूद होने के बावजूद यहां यातायात व्यवस्था ठप है। ऐसे में लोग डग्गामार वाहनों से अपने गंतव्य तक जाते हैं।
सुबह और शाम निश्चित समय पर ही भरवारी रेलवे स्टेशन से ट्रेनों का संचालन होता है। दिल्ली, कानपुर, फतेहपुर, खागा, सिराथू सहित अन्य शहरों के लिए सुबह 8:54 बजे चौरी चौरा एक्सप्रेस और 9:55 बजे सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस उपलब्ध है, जबकि शाम को 6:40 बजे संगम एक्सप्रेस, 7:00 बजे कानपुर इंटरसिटी और 8:00 बजे महाबोधि एक्सप्रेस यात्रियों को गंतव्य तक ले जाती है।
वहीं प्रयागराज, वाराणसी और पटना-गया रूट के लिए सुबह 6:45 बजे संगम एक्सप्रेस, 8:28 बजे चित्रकूट इंटरसिटी, दोपहर 4:44 बजे सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस और शाम को पैसेंजर मेमू, चौरी चौरा और महाबोधि एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा यात्रियों के पास दूसरा विकल्प लगभग खत्म हो गया है।
रोडवेज की बसें वर्षों से भरवारी कस्बे में नजर नहीं आईं। वहीं हाई गेज रेलवे क्रॉसिंग बनने के बाद निजी बसें भी बाईपास होकर निकल जाती हैं। इससे यात्रियों को कस्बे से लगभग तीन किलोमीटर दूर उतरकर दोबारा किराया चुकाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। स्थानीय व्यापारी नीरज कौशल बताते हैं कि पहले बाहर से आने वाला सामान सीधे दुकान तक बस से पहुंच जाता था लेकिन अब बाईपास से लाने पर दोबारा किराया देना पड़ रहा है और समय भी अधिक लग रहा है।
अरुण केसरवानी ने बताया कि अब खर्च बढ़ने के साथ-साथ परेशानी भी दोगुनी हो गई है। वहीं कस्बे के रोहित का कहना है कि रात में लौटते वक्त बाईपास से पैदल ही घर जाना पड़ता है। स्थानीय लोग अब डग्गामार वाहनों और निजी साधनों के सहारे ही सफर करने के लिए मजबूर हैं।
भरवारी कस्बे में बस संचालन के लिए सर्वे कर एआरएम लीडर रोड प्रयागराज को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी। बस के संचालन के लिए प्रयास किया जाएगा-गंगा शंकर शर्मा, बस डिपो इंचार्ज