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Kaushambi News: कल सूर्य देव वृश्चिक राशि में करेंगे प्रवेश, शुरू होगा हेमंत ऋतु

Sat, 15 Nov 2025 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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भगवान श्रीकृष्ण और सूर्यदेव को समर्पित मार्गशीर्ष मास के साथ हेमंत ऋतु कल यानी 16 नवंबर से प्रारंभ होगा। इसमें शुभ कार्य और भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करना अच्छा माना जाता है। मार्गशीर्ष महीने में स्नान और दान का महत्व बताया गया है। रविवार से सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इस महीने में गरीबों और ब्राह्मणों में अन्न, वस्त्र का दान करना चाहिए। ग्रहों की शांति के लिए भी उचित दान करना शुभ माना गया है।
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हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत गीता के दसवें अध्याय में भगवान अपनी विभूति वर्णन के अंतर्गत बारह महीनों में मार्गशीर्ष माह श्रेष्ठ माना गया है। चंद्र मास की दृष्टि से छह नवंबर से चार दिसंबर तक मार्गशीर्ष मास रहेगा, जबकि सौर मास, वृश्चिक संक्रांति के अनुसार 16 नवंबर दोपहर 1:45 बजे से 16 दिसंबर सुबह 4:27 बजे तक मार्गशीर्ष रहेगा।
उन्होंने बताया कि यह माह भगवान कृष्ण और सूर्य देव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में भगवान कृष्ण की उपासना करने से मनुष्य को जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिलती है। सूर्य देव की पूजा करने से शरीर आरोग्य रहता है।
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आरोग्य के लिए सूर्य देव की करें आराधना
जीवन में मनुष्य का ऊंचे पद की प्राप्ति के लिए भी इस महीने सूर्यदेव की आराधना करनी चाहिए। कल से सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल है और मंगल सूर्य देव के मित्र हैं। ऐसे में मार्गशीर्ष महीने में सूर्य देव की आराधना करना शुभमाना गया है।
सूर्य देव अपने भक्तों को ऊर्जा, स्फूर्ति और गुप्त रूप से नया करने की प्रेरणा देते हैं। इस पूरे महीने सूर्य देव को जल से अर्घ्य देने से शरीर आरोग्य रहता है। आंखों और हड्डियों से जुड़े रोग दूर होते हैं। सूर्य देव पिता के कारक हैं। सूर्य उपासना करने से पिता के साथ संबंध अच्छे होते हैं और जीवन में ऊंचे पद की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि मार्गशीर्ष महीना भगवान कृष्ण को बेहद प्रिय है। संपूर्ण उपनिषदों का सार श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन को मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को दिया था। इस माह में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना भी उत्तम होता है। मार्गशीर्ष माह में भगवान श्रीराम व सीता जी का विवाह हुआ था, इसलिए यह महीना विवाह, संस्कार, धार्मिक आयोजन करने के लिए बेहद शुभ है।
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