जिले को 31 मार्च तक ओडीएफ घोषित किया जाना है। इसके विपरीत जमीनी हकीकत कुछ और है। नगर पालिका भरवारी में सार्वजनिक शौचालय की बदहाली से मुसाफिरों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
चिकित्सा, शिक्षा, अर्थ-व्यापार और यातायात के लिहाज से जिले के प्रमुख कस्बों में शामिल नगर पालिका भरवारी में रोजाना हजारों बाहरी लोगों का आवागमन होता है। इसके बावजूद कस्बे में सार्वजनिक शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बाहर से आने वाले इन मुसाफिरों को रेल की पटरियों के किनारे खुले में शौच जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। एक दसक पहले नगर में बसड्डा के पीछे, गौरा रोड में छोटी कुटी के पास, ईदगाह के पीछे व पानी टंकी रोड समेत चार स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनवाया गया था। इनमें से बस स्टॉफ वाला शौचालय साफ-सफाई के अभाव में इस्तेमाल करने लायक नहीं है। जबकि बाकी तीनों शौचालय पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं।
नगर पालिका भरवारी का काफी विस्तार हो चुका है। स्कूल-कॉलेज के साथ ही व्यापारिक हब होने के कारण यहां दिनभर लोगों का आवागमन बना रहता है। सर्वाधिक परेशानी महिलाओं को होती है। उन्हें खुले में
एक तरफ सरकार खुले में शौच के लिए लोगों को जागरूक कर रही है। दूसरी तरफ भरवारी जैसे महत्वपूर्ण कस्बे में कोई सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं की जा रही है। ऐसे में लोगों को शौचालय रेलवे की पटरियों का सहारा लेना पड़ता है।
भरवारी कस्बे में कहीं भी शौचालय अथवा मूत्रालय की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके लिए लोगों को काफी परेशान होना पड़ता है। बाहरी लोगों को रेल की पटरियों की तरफ खुले में शौच जाने की मजबूरी होती है।
नगर में बना सार्वजनिक शौचालय देखरेख के अभाव में बदहाल है। सफाई कर्मियों की भारी-भरकम फौज के बावजूद इनकी साफ-सफाई नहीं कराई जा रही है।
नगर में सार्वजनिक शौचालय निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। स्व्ीकृति भी मिल गई है। भूमि की तलाश कर जल्द ही निर्माण प्रारंभ करा दिया जाएगा। साथ ही पुराने शौचालयों की भी मरम्मत कराई जाएगी।
दिनेश कुमार सिंह-ईओ,भरवारी