कड़ा (ब्यूरो)। अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए सबका दाता राम। ये दोहा कड़ा की धरती पर संवत 1631 (सन 1574) में जन्मे सूफी संत मलूकदास ने कहा था। बुधवार को ऐसे महान संत का जन्मदिन है। कड़ा स्थित मलूक साधना स्थल पर 446 वें जन्मदिन पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
संवत 1631 की वैशाख बदी 5 को कड़ा के कक्कड़ खत्री सुंदरदास के घर में जन्मे संत मलूकदास के बचपन का नाम मल्लू था। बचपन से ही अत्यंत उदार एवं कोमल हृदय के मल्लू खास पढ़े-लिखे नहीं थे। इनके प्रथम गुरू पुरुषोत्तम थे। मलूकदास ने दीक्षा मुरारिस्वामी से ग्रहण की थी। संवत 1739 की वैशाख बदी 14 (सन 1682) में कड़ा में ही इनका देहांत हुआ। संत मलूकदास की अलखबानी, गुरुप्रताप, ज्ञानबोध, पुरुषविलास, भगत बच्छावली, भगत विरुदावली, रतनखान, रामावतार लीला, साखी, सुखसागर तथा दसरत्न समेत 21 रचनाओं का विशेष उल्लेख मिलता है। इनकी रचनाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि इन्हें परमात्मा के अस्तित्व में प्रबल आस्था थी। मलूकदास ईश्वर नाम के स्मरण को विशेष महत्व देते थे। कड़ा स्थित मलूक साधना स्थल पर विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। संस्था के सचिव शिवाकांत पांडेय ने बताया कि बुधवार को संत मलूकदास के देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद तमाम अनुयाइयों का साधना स्थली पर जमावड़ा लगेगा।