ख्वाहिश हो जब ऊंची उड़ान की तो आपको कोई रोक नहीं सकता है। विषम परिस्थितियों में भी लोग मंजिल तक पहुंचने का रास्ता खोज ही लेते हैं। अपने सपनों को पूरा करने के लिए जितनी मेहनत कौशाम्बी की बेटियां कर रहीं हैं, उससे कई गुना ज्यादा उनके पिता। कौशाम्बी के उड़नपुर की धावक सुनीता से प्रेरित होकर गांव की दो बेटियों ने एथलेटिक्स में अपना भविष्य बनाने का फैसला किया। बेटियों के सपनों को उड़ान देने के लिए पिता उन्हें 17 किमी. दूर गांव से स्टेडियम साइकिल से छोड़ने आते हैं। बेटियां भी सुबह-शाम प्रैक्टिस कर एथलेटिक्स की बारीकियां सीख रही हैं।
बरई बंधवा गांव निवासी सुनीता अंतरराष्ट्रीय धावक हैं। इनकी दिखाई राह पर गांव की मोनिका व पूजा देवी चल पड़ी हैं। दोनों ने स्टेडियम में दाखिला लेकर एथलेटिक्स का अभ्यास शुरू किया। गांव से स्टेडियम दूर होने की वजह से उनका आना-जाना मुश्किल हो रहा था। जिस वजह वह ठीक से प्रैक्टिस नहीं कर पा रही थीं। उनके सपने टूटे नहीं, इसके लिए पूजा के पिता नोखेलाल और मोनिका के पिता महेश उन्हें 17 किमी साइकिल चलाकर मंझनपुर स्थित स्टेडियम छोड़ने आते थे। वहीं, परिवार चलाने के लिए दोनों मजदूरी भी करते हैं।
हालांकि, अब बेटियों ने आने वाली प्रतियोगिताओं को देखते हुए मंझनपुर के कोड़र में किराये का कमरा ले लिया है। ताकि, वह ज्यादा वक्त तक अभ्यास कर सकें। यहां से वह सुबह-शाम जिला स्टेडियम में खेल का अभ्यास करती हैं। साथ ही दोनों ने श्री दुर्गा देवी इंटर कॉलेज में अपना नामांकन कराया है। यहां आठवीं की पढ़ाई भी कर रहीं हैं।